रायपुर, 2 जुलाई 2026 (वेदांत समाचार)। छत्तीसगढ़ में निर्माणाधीन पुलों, फ्लाईओवर और रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) परियोजनाओं को समय पर पूरा कराने के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) ने सख्त रुख अपनाया है। विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल ने गुरुवार को वरिष्ठ अधिकारियों, मैदानी इंजीनियरों और ठेकेदारों की समीक्षा बैठक लेकर सभी निर्माण कार्यों की प्रगति का विस्तृत जायजा लिया। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रत्येक परियोजना की नियमित मॉनिटरिंग की जाए, कार्यस्थलों का लगातार निरीक्षण हो और हर महीने प्रगति की समीक्षा अनिवार्य रूप से की जाए।
रायपुर स्थित सिरपुर भवन में आयोजित बैठक में सचिव ने कहा कि सभी निर्माण कार्य निर्धारित माइलस्टोन के अनुसार तय समयसीमा में पूरे होने चाहिए। जिन ठेकेदारों की प्रगति संतोषजनक नहीं होगी, उनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्माण कार्यों की गुणवत्ता के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं करने के निर्देश दिए।
बैठक में प्रदेशभर में निर्माणाधीन पुलों की संभागवार और वर्षवार समीक्षा की गई। सचिव ने विशेष रूप से बस्तर क्षेत्र में आरसीपीएलडब्ल्यूए (RCPLWA) के तहत निर्माणाधीन पुलों को हर हाल में दिसंबर 2026 तक पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने पुल, फ्लाईओवर और रेलवे ओवरब्रिज निर्माण की प्रत्येक प्रक्रिया को तय समयसीमा में पूरा करने के लिए मुख्य अभियंता को विस्तृत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार करने और उसका कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा।
मुकेश कुमार बंसल ने निर्माण स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों के दौरान सड़क सुरक्षा और श्रमिक सुरक्षा से जुड़े सभी मानकों का पूरी तरह पालन किया जाए ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना या जनहानि की संभावना न रहे। साथ ही मैदानी अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे नियमित निरीक्षण कर कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करें और सत्यापन के बाद ठेकेदारों के भुगतान में अनावश्यक देरी न हो। उन्होंने ठेकेदारों को हर महीने समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।
बैठक में चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 और पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 के नए निर्माण कार्यों पर भी चर्चा हुई। सचिव ने अधिकारियों को 31 जुलाई तक प्राथमिकता के आधार पर सभी नए कार्यों के प्राक्कलन (एस्टीमेट) भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने विशेष रूप से ऐसे गांवों को प्राथमिकता देने को कहा, जहां अब तक बारहमासी सड़क संपर्क उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा द्रुतगामी सड़कों पर जहां नए पुलों की आवश्यकता है, उनके प्रस्ताव भी प्राथमिकता सूची में शामिल करने को कहा गया।
उन्होंने अधिकारियों को कलेक्टरों के साथ समन्वय स्थापित कर भूमि अधिग्रहण, वन स्वीकृति, पेड़ कटाई, ब्लास्टिंग अनुमति और भूमि विवाद जैसे लंबित मामलों का जल्द समाधान कराने के निर्देश दिए। यदि स्थानीय स्तर पर समस्याओं का समाधान नहीं हो सके तो तत्काल उच्च कार्यालय को अवगत कराने के लिए कहा गया, ताकि परियोजनाओं में अनावश्यक देरी न हो।
लोक निर्माण विभाग के सचिव ने अधिकारियों को भारत सरकार के गतिशक्ति पोर्टल पर राज्य के सभी पुलों से संबंधित जानकारी 10 जुलाई 2026 तक अपलोड करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं की पारदर्शी निगरानी और समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग जरूरी है।
बैठक में रायपुर में निर्माणाधीन स्काई-वॉक परियोजना की भी समीक्षा की गई। सचिव ने अधिकारियों को स्काई-वॉक के संचालन और रखरखाव की विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने साफ-सफाई, बिजली आपूर्ति, नियमित रखरखाव और सुरक्षा व्यवस्था की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करने के साथ ही परियोजना के पूरा होने के बाद इसे नगर निगम को हैंडओवर करने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए।
अधिकारियों ने बताया कि करीब 1.2 किलोमीटर लंबे स्काई-वॉक का निर्माण कार्य दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस स्काई-वॉक में लोगों की सुविधा के लिए 9 एस्केलेटर और 4 लिफ्ट भी लगाए जाएंगे।
समीक्षा बैठक के बाद लोक निर्माण विभाग के सचिव ने पुल निर्माण में लगे ठेकेदारों के साथ अलग से बैठक कर परियोजनाओं में आ रही व्यावहारिक समस्याओं की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि पुल केवल निर्माण परियोजनाएं नहीं हैं, बल्कि दूरस्थ क्षेत्रों को मुख्य मार्गों से जोड़ने, बारहमासी आवागमन सुनिश्चित करने और माल परिवहन को सुगम बनाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना हैं। इसलिए गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयसीमा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने सभी ठेकेदारों से अनुबंध की शर्तों के अनुरूप तय समय में उच्च गुणवत्ता के साथ निर्माण कार्य पूरा करने की अपेक्षा जताई।

