बिलासपुर, 02 जुलाई (वेदांत समाचार)। बिलासपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) रामगोपाल गर्ग ने रेंज के सभी जिलों के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों और पुलिस अधीक्षकों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा बैठक लेकर कानून-व्यवस्था, एनडीपीएस (NDPS) मामलों, न्यायालयीन समन-वारंट की तामीली और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन से जुड़ी शिकायतों की विस्तार से समीक्षा की। बैठक में लंबित एनडीपीएस मामलों में फरार आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी, न्यायालयीन आदेशों के समयबद्ध पालन और शिकायतों के त्वरित निराकरण पर विशेष जोर दिया गया।
आईजी रामगोपाल गर्ग ने बताया कि साप्ताहिक समीक्षा बैठकों की श्रृंखला के तहत इस बार मुख्य रूप से धारा 173(8) सीआरपीसी/193(9) बीएनएसएस तथा धारा 299 सीआरपीसी/335 बीएनएसएस के तहत लंबित प्रकरणों की समीक्षा की गई। उन्होंने उन मामलों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए, जिनमें आरोपी अब तक गिरफ्तार नहीं हो सके हैं या जिनके खिलाफ फरारी के दौरान चालान पेश किया जा चुका है।
बैठक में एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज मामलों की विस्तृत समीक्षा करते हुए आईजी ने सभी पुलिस अधीक्षकों को प्रत्येक लंबित प्रकरण के लिए अलग-अलग कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए अंतर्राज्यीय और अंतरजिला स्तर पर समन्वय बढ़ाया जाए तथा आवश्यक होने पर संबंधित राज्यों की पुलिस से लगातार संपर्क बनाए रखा जाए।

आईजी ने निर्देश दिए कि फरार आरोपियों की पूरी जानकारी नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) और संबंधित राज्यों की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) के साथ साझा की जाए। साथ ही आरोपियों के पैन कार्ड, आधार कार्ड, बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन की जानकारी एकत्र कर उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जाए। मोबाइल फोन, वाहन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का भी अधिकतम उपयोग करने के निर्देश दिए गए।
उन्होंने नेटग्रिड (NATGRID) से प्राप्त इनपुट का प्रभावी उपयोग करते हुए पुलिस टीमों को विभिन्न स्थानों पर सक्रिय रखने और खुफिया जानकारी जुटाने पर जोर दिया। साथ ही पहले से गिरफ्तार सह-आरोपियों से गहन पूछताछ कर फरार अपराधियों के संभावित ठिकानों की जानकारी जुटाने के निर्देश भी दिए। आईजी ने स्पष्ट किया कि सभी पुलिस अधीक्षक स्वयं ऐसे मामलों की नियमित मॉनिटरिंग करें और विवेचना लगातार जारी रखें।
बैठक में न्यायालयों द्वारा जारी समन और वारंट की तामीली की भी समीक्षा की गई। आईजी रामगोपाल गर्ग ने गंभीर मामलों में डॉक्टरों और पुलिस अधिकारियों जैसे महत्वपूर्ण गवाहों के संबंध में जारी जमानती और गिरफ्तारी वारंटों की समय पर तामीली नहीं होने पर नाराजगी जताई। उन्होंने सभी पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिए कि वे स्वयं इसकी निगरानी करें और न्यायालयीन आदेशों का समय पर पालन सुनिश्चित करें। उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से गवाही की व्यवस्था को भी प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। आईजी ने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में रेंज कार्यालय को न्यायालय से समन या वारंट तामील कराने के लिए भेजे जाते हैं और उसमें लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित थाना प्रभारी और नोडल राजपत्रित अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी।
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन से प्राप्त शिकायतों की समीक्षा के दौरान आईजी ने कहा कि सभी शिकायतों का निर्धारित समय सीमा के भीतर निराकरण सुनिश्चित किया जाए। यदि शिकायतें समय सीमा समाप्त होने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर तक पहुंचती हैं तो संबंधित थाना प्रभारी के खिलाफ कारण बताओ (शो कॉज) नोटिस जारी कर कार्रवाई की जाए। उन्होंने पुलिस अधीक्षकों को व्यक्तिगत रूप से शिकायतों की मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए।
बैठक के अंत में आईजी रामगोपाल गर्ग ने सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को निर्देशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करने, जिलों में कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने, सराफा बाजारों की नियमित जांच तथा पिकेट पॉइंट्स पर लगातार चेकिंग अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अगले महीने एक बार फिर एनडीपीएस मामलों की समीक्षा की जाएगी और लंबित मामलों की प्रगति का आकलन किया जाएगा।
समीक्षा बैठक में बिलासपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह, रायगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह, मुंगेली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल, कोरबा के पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी, जांजगीर-चांपा के पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय, सक्ती के पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अविनाश मिश्रा, सारंगढ़ की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक निमिषा पाण्डेय सहित सभी जिलों के एएनटीएफ प्रभारी, समन-वारंट शाखा तथा मुख्यमंत्री हेल्पलाइन शाखा के नोडल अधिकारी उपस्थित रहे।

