CG NEWS : प्रोटेक्टेड फॉरेस्ट में गाड़े खंभे, खींची 33 kv लाइन NOC राजस्व वन में धनवादा पावर ने भू-प्रत्यावर्तन नियमों का किया उल्लंघन वन विभाग ने किया अघोषित समझौता.. - vedantsamachar.in

CG NEWS : प्रोटेक्टेड फॉरेस्ट में गाड़े खंभे, खींची 33 kv लाइन NOC राजस्व वन में धनवादा पावर ने भू-प्रत्यावर्तन नियमों का किया उल्लंघन वन विभाग ने किया अघोषित समझौता..

रायगढ़,02 जुलाई (वेदांत समाचार)। धनवादा पावर की महज 7.5 मेगावाट पावर प्रोजेक्ट के लिए नदी, जंगल, जमीन सबकुछ अफसरों ने दान कर दिया। कंपनी को कहीं भी खुलकर काम करने की छूट दे दी। कंपनी को एनओसी राजस्व वन भूमि क्षेत्र में दी गई थी लेकिन काम प्रोटेक्टेड फॉरेस्ट में किया गया है। दो कम्पार्टमेंट की जमीन पर कंपनी ने 33 केवी लाइन डाल दी है। सीएसपीडीसीएल के अफसरों ने तो पहले डीएफओ से 11 केवी लाइन की मरम्मत करने के लिए अनुमति ली। दरअसल हाथी प्रभावित क्षेत्र में लटकते तारों को सुधारना था। कंपनी ने भालूपखना के खनं 347, 365, रेंगामाखुर्द के खनं 29/2, 87/2, 94/2 और चरखापारा के 792/1 में राजस्व वन क्षेत्र में 33 केवी ट्रांसमिशन लाइन बिछाने के लिए तत्कालीन कलेक्टर से एनओसी ली। इन तीनों गांवों में कुल 2.510 हे. पर कलेक्टर ने एनओसी दे दी।

वन विभाग द्वारा भू-प्रत्यावर्तन की कार्यवाही करने के बाद ही काम शुरू किया जाना था, लेकिन कंपनी ने मनमानी करते हुए अफसरों के संरक्षण में जमीन पर काम शुरू कर दिया। हैरानी की बात यह है कि अनुमति तो केवल राजस्व वन भूमि छोटे बड़े झाड़ के जंगल पर मिली थी, लेकिन काम पीएफ कम्पार्टमेंट नंबर 101 और 99 में किया गया। इसके लिए कोई अनुमति नहीं मिली। प्राइवेट कंपनी को अपनी निजी 33 केवी लाइन ले जाने के लिए 15 मीटर चौड़ा कॉरिडोर लेने की जरूरत होती है। उक्त भूमि का डायवर्सन करना अनिवार्य होता है। वन भूमि पर डायवर्सन की अनुमति केंद्रीय मंत्रालय को है। मजे की बात यह है कि कंपनी ने बिना वन विभाग से प्रत्यावर्तन की कार्यवाही कराए निर्माण प्रारंभ कर दिया। अब इसमें भी ट्विस्ट तब आया जब पीसीसीएफ ने प्रस्ताव पर आपत्ति कर दी।

डीएफओ ने धनवादा कंपनी के प्रस्ताव पर प्रतिवेदन बनाकर अनुमति के लिए पीसीसीएफ को भेजा था। वहां से जो आपत्तियां आईं, उनका निराकरण किए बिना ही कंपनी पहले ही काम पूरा कर चुकी थी। पीसीसीएफ ने कंपनी के प्रस्ताव पर गंभीर टिप्पणी की थी। साढ़े चार हेक्टेयर वन भूमि प्रभावित होने का जिक्र करते हुए उन्होंने डीएफओ को लिखा कि प्रस्ताव में ऑनलाइन और ऑफलाइन त्रुटियां हैं। अपलोड जानकारी अधूरी है, केएमएल में तीनों एलाइनमेंट स्पष्ट नहीं हैं। नक्शा भी नहीं है। सीए योजना पुराने नियम से बनाई गई है जबकि नियम बदल चुके हैं। प्रत्याशा मूल्य गणना पत्रक मुख्य वन संरक्षक से अनुमोदित नहीं है। इन आपत्तियों के बाद डीएफओ ने धनवादा पावर को नोटिस दिया था। सीएसपीडीसीएल के अधिकारियों ने धनवादा कंपनी के लिए दरवाजे खोल दिए थे। कोई नियम की परवाह किए नए पोल गाड़कर कंपनी को सौंप दिए। इतनी तेजी किसी विद्युत्विहीन गांव में बिजली पहुंचाने के लिए नहीं दिखाई जाती। ट्रांसफार्मर जल जाने पर लोग कई बार चक्कर लगाते हैं, लेकिन सीएसपीडीसीएल दफ्तर में धनवादा पावर को हाथोंहाथ लिया गया।