रायपुर,25 जून (वेदांत समाचार)। गायत्री जयंती और गंगा दशहरा के पावन अवसर पर राजधानी रायपुर के समता कॉलोनी और दावड़ा कॉलोनी स्थित गायत्री शक्तिपीठों में भव्य धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस विशेष अवसर पर 5 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने आत्मकल्याण, जनकल्याण और विश्व कल्याण की कामना के साथ आहुतियां दीं। महायज्ञ के दौरान समाज को सुसंस्कृत बनाने के उद्देश्य से वैदिक परंपराओं के अनुसार 3 पुंसवन, 8 विद्यारंभ, 3 अन्नप्राशन एवं 2 लोगों का जन्मदिवस संस्कार पूरी तरह निःशुल्क संपन्न कराया गया। गायत्री परिवार के प्रबुद्ध जनों ने इन संस्कारों के वैज्ञानिक और आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला।
महायज्ञ की पूर्णाहुति के बाद दोनों शक्ति पीठों में महत्वपूर्ण विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें गायत्री शक्ति पीठ के ट्रस्टीगणों के साथ गायत्री परिवार के प्रमुख परिजनों और पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। गोष्ठी का मुख्य उद्देश्य जन्मशताब्दी वर्ष की तैयारी में परिजनों का दायित्व एवं योगदान तथा परम पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा शुरू किए गए ’’सप्त आंदोलन’’ (साधना, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलंबन, नारी जागरण, व्यसन मुक्ति और पर्यावरण संरक्षण) को गति देते हुए आगामी दिनों में इन आंदोलनों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए अपनी कार्ययोजनाएं पर विचार साझा किए गये। गोष्ठी में मुख्य रुप से समता कॉलोनी में शांतिकुंज हरिद्वार से छत्तीसगढ़ के प्रभारी सुखदेव निर्मलकर, जोन समन्वयक (छत्तीसगढ़) आदर्श वर्मा, जिला समन्वयक लच्छुराम निषाद, शक्ति पीठ के मुख्य प्रबंध ट्रस्टी श्यामलाल बैस, ट्रस्टीगण सर्वश्री सदाशिव हथमल, हनुमान प्रसाद अग्रवाल, दीनानाथ शर्मा, शैलेष वर्मा, रामरतन सोनबेर, एवं दावड़ा कॉलोनी में मुख्य प्रबंध ट्रस्टी सुखदेव देवांगन, ट्रस्टीगणों में ज्योति दावड़ा, साधना काले, पीताम्बर साहू, अरविंद गिरी, मोहन जसवानी, भाई नीलम सिन्हा सहित अनेक परिजन उपस्थित थे।
गायत्री परिवार के मीडिया प्रभारी प्रज्ञा प्रकाश निगम ने बताया कि वर्ष 1990 में गायत्री जयंती के दिन ही गायत्री परिवार के संरक्षक, संस्थापक वेदमूर्ति तपोनिष्ठ आचार्य पं. श्रीराम शर्मा जी ने अपने स्थूलशरीर के बन्धनों से मुक्त होकर भौतीक शरीर को त्यागकर इसी पावन दिन माँ गायत्री की गोद में विलीन हो गए थे अतः यह दिन उनके महाप्रयाण का भी दिन है। गायत्री जयंती के पूण्य अवसर पर प्रफुल्ल अग्रवाल (एड्वोकेट) ने अपने स्वर्गीय पिताजी अशोक अग्रवाल जी की स्मृति में गायत्री शक्तिपीठ समता कालोनी में संचालित फिजियोथैरेपी सेंटर के उपयोग हेतु एक व्हीलचेयर एवं वाकर प्रदान किया गया।
मुख्य शक्तिपीठों के अलावा, गायत्री परिवार की रीढ़ माने जाने वाले रायपुर शहर के सभी प्रज्ञा पीठों और प्रज्ञा मंडलों (तेलीबांध, संतोषी नगर, कुशालपुर, टाटीबंध, कोटा, खमतराई, राजातालाब, बोरियाखुर्द, महादेवघाट) में भी भक्तिमय माहौल रहा। स्थानीय स्तर पर सकारात्मक ऊर्जा के विस्तार के लिए प्रत्येक प्रज्ञा पीठ और प्रज्ञा मंडल में एक कुंडीय गायत्री यज्ञ का आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय मोहल्लेवासियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। आयोजन के पश्चात महाप्रसाद का वितरण किया गया। इस वृहद धार्मिक आयोजन ने रायपुर शहर के वातावरण को अध्यात्म, सेवा और संकल्प की त्रिवेणी से सराबोर कर दिया।

