रायपुर, 10 अप्रैल (वेदांत समाचार)। प्रदेश के कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे छात्रों को हॉस्टल नहीं मिलने पर किराये की चिंता नहीं करनी पड़ेगी। एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के स्नातक और स्नातकोत्तर छात्रों के लिए मुख्यमंत्री शिक्षा सहयोग योजना लागू होगी। इसका ड्राफ्ट तैयार हो गया है। योजना को जून से शुरू होने वाले शैक्षणिक सत्र में ही लागू करने की तैयारी है। योजना लागू होने पर छात्र अपने कॉलेज के पास किराये के मकान में रह सकेंगे। सरकार उन्हें प्रतिमाह आर्थिक सहायता देगी। रायपुर में प्रतिमाह 3 हजार रुपए जबकि अन्य संभागीय मुख्यालयों में 2500 रुपए दिए जाएंगे।
अब तक पोस्ट मैट्रिक छात्रावासों सीटों की संख्या कम होने के कारण हर साल बड़ी संख्या में छात्र प्रवेश से वंचित रह जाते थे। मजबूरी में उन्हें दूर स्थित छात्रगृहों में रहना पड़ता था या निजी स्तर पर महंगे किराये के मकान लेने पड़ते थे। इस समस्या को देखते हुए सरकार ने छात्रगृह योजना को बंद कर नई व्यवस्था लाने का निर्णय लिया है, ताकि छात्र अपने कॉलेज या यूनिवर्सिटी के पास ही रह सकें।
ऐसे मिलेगी सहायता योजना के तहत राजधानी रायपुर में पढ़ने वाले छात्रों को 3000 रुपए प्रतिमाह दिया जाएगा। अन्य बिलासपुर, दुर्ग, बस्तर और सरगुजा संभागीय मुख्यालयों में 2500 प्रतिमाह जबकि जिला व विकासखंड मुख्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों को 2000 रुपए प्रतिमाह सहायता मिलेगी। यह राशि साल में 10 महीने के लिए तीन किश्तों में दी जाएगी। इस योजना के तहत स्नातक कोर्स के लिए अधिकतम 4 साल और स्नातकोत्तर के लिए 2 साल, यानी कुल 6 साल तक लाभ दिया जाएगा।
इन्हें नहीं होगी पात्रता: किसी संस्था द्वारा संचालित छात्रावास, सरकारी छात्रावास, अशासकीय अनुदान प्राप्त संस्था या अशासकीय संस्था के भवन में रहने वाले छात्रों को इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा।
आय और मेरिट के आधार पर चयन किया जाएगा योजना का लाभ उन्हीं छात्रों को मिलेगा जिनके परिवार की वार्षिक आय 2.5 लाख रुपए से कम है। चयन मेरिट के आधार पर किया जाएगा।स्नातक में प्रवेश के लिए 12वीं में प्रथम श्रेणी और स्नातकोत्तर के लिए स्नातक में कम से कम 55% अंक जरूरी होंगे।
एससी, एसटी और ओबीसी की संख्या 2.59 लाख प्रदेश में उच्च शिक्षा से जुड़े 343 शासकीय कॉलेज हैं। यहां स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर कुल 2.88 लाख छात्र हैं। इनमें एसटी वर्ग के 74 हजार विद्यार्थी हैं। एससी वर्ग के 44 हजार, ओबीसी वर्ग से 1.41 लाख और सामान्य वर्ग के करीब 29 हजार छात्र हैं।
