हस्तशिल्प हमारी जीवंत विरासत हैं; उन्हें बढ़ावा देने के लिए सभी प्रयास किए जाने चाहिए : उपराष्ट्रपति

नई दिल्ली29 नवंबर। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि हमारे हस्तशिल्प हमारी जीवंत विरासत है, साथ ही उन्होंने हस्तशिल्प के सभी उपभोक्ताओं से स्थानीय निर्मितियों की सराहना करने और इसके बारे में मुखर होने का आग्रह किया। उन्होंने भारतीय हस्तशिल्प उत्पादों के संगठित विपणन और उनकी ब्रांडिंग को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि आतंरिक वास्तुशिल्पियों (इंटीरियर डिजाइनरों) को इस समृद्ध सम्पदा पर भी ध्यान देना चाहिए। नई दिल्ली के विज्ञान भवन में वर्ष  2017, 2018, 2019 के लिए शिल्प गुरु और राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान करने के बाद उपस्थित जन समुदाय को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि हमारे उत्कृष्ट शिल्पकारों की अनूठी प्रतिभा भारत का प्रतिनिधित्व करती है। उन्होंने उपस्थित शिल्प गुरुओं से कहा, अपनी सूक्ष्म कारीगरी से, आप भारत की सांस्कृतिक विविधता को सुशोभित और समृद्ध करते हैं। आप कौशल और शिल्प कौशल की भारत की समृद्ध परंपरा का प्रतिनिधित्व करते हैं।

श्री धनखड़ ने भारतीय शिल्पकारों को देश की संस्कृति और रचनात्मकता का प्रभावशाली दूत बताते हुए कहा कि उन्हें सम्मानित कर राष्ट्र उन अज्ञात कुशल शिल्पकारों की असंख्य पीढ़ियों का सम्मान कर रहा है, जो अपने पीछे इतनी समृद्ध विरासत छोड़ गए हैं। यह देखते हुए कि इन कौशलों में महारत प्राप्त करने के लिए कई पीढ़ियों के प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है, उपराष्ट्रपति ने कहा कि आप सबकी रचनात्मकता, कौशल और कड़ी मेहनत के कारण, भारत की हस्तकला की विश्व में सबसे अधिक मांग है। उन्होंने कहा आप भारत की रचनात्मक परंपरा का प्रतिनिधित्व करते हुए शिल्प कौशल की भारत की अमूर्त विरासत को आगे बढ़ाते हैं।