कोरबा की एक रेत खदान के चक्कर में फंसे रायगढ़ के दो रेतघाट... - vedantsamachar.in

कोरबा की एक रेत खदान के चक्कर में फंसे रायगढ़ के दो रेतघाट…

रायगढ़,15 जून (वेदांत समाचर)। रायगढ़ जिले में स्वीकृत रेतघाटों की संख्या केवल एक है। पूर्व में 15 रेत खदानों की नीलामी की गई थी। पर्यावरणीय मंजूरी मिलने के बाद उत्पादन प्रारंभ हो जाता। लेकिन दो खदानें नए झमेले में फंस गई हैं। छाल तहसील में मांड नदी के दूसरी ओर कोरबा जिले की एक खदान स्वीकृत हो गई है। तीन रेतघाट 500 मीटर से कम दूरी में सट गई हैं। इसलिए अब जनसुनवाई करानी होगी। रेत खदानों के चिह्नांकन में जिलों के बीच सामंजस्य में कमी का नुकसान हो रहा है।

कोरबा जिले ने मांड नदी में एक रेत घाट स्वीकृत किया था। नीलामी के बाद यहां खनन भी प्रारंभ हो चुका है। इसी रेत घाट के दूसरी ओर रायगढ़ जिले में दो रेत खदानें जोगड़ा-1 और जोगड़ा-2 खदानें चिह्नित की गई थी। दोनों रेतघाट खसरा नंबर 452 में स्वीकृत थी। इनकी नीलामी भी हो चुकी है लेकिन समस्या यह है कि अब इन दोनों घाटों के बीच नदी के दूसरी ओर कोरबा जिले में एक रेत खदान मंजूर कर ली गई है। तीन रेतघाटों का क्लस्टर हो गया है। तीनों के बीच में दूरी 500 मीटर से भी कम रह गया है। इसलिए अब रायगढ़ जिले की दोनों रेत खदानें तब तक शुरू नहीं हो सकती, जब तक जनसुनवाई न हो जाए या फिर दोनों की नीलामी निरस्त करके नए लोकेशन में रेतघाट मंजूर किए जाएं।

खनिज विभाग अब पर्यावरणीय मंजूरी के समय यह समस्या संचालनालय के समक्ष रखेगा। पहले कांग्रेस सरकार ने रेत खदानों की नीलामी समय पर नहीं की। अब भाजपा सरकार के कार्यकाल में भी लेटलतीफी हो रही है। नवंबर में नीलामी पूरी हो चुकी है। करीब सात महीने बीत चुके हैं लेकिन अब तक पर्यावरणीय स्वीकृति नहीं मिल सकी है। उसरौट को काफी मशक्कत के बाद शुरू कराया जा सका है। बाकी रेतघाटों को मंजूरी का इंतजार है।