विश्व पर्यावरण दिवस पर कुतुब मीनार से गूंजा गोडावण संरक्षण का संदेश, ग्रेट इंडियन बस्टर्ड की वापसी का मनाया गया जश्न - vedantsamachar.in

विश्व पर्यावरण दिवस पर कुतुब मीनार से गूंजा गोडावण संरक्षण का संदेश, ग्रेट इंडियन बस्टर्ड की वापसी का मनाया गया जश्न

नई दिल्ली, 10 जून 2026। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर देश की राजधानी में भारत के सबसे दुर्लभ और संकटग्रस्त पक्षियों में से एक गोडावण (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड) के संरक्षण और पुनर्वास की सफलता का जश्न मनाया गया। दिल्ली के ऐतिहासिक स्मारक कुतुब मीनार पर एक विशेष प्रोजेक्शन शो के माध्यम से गोडावण की संघर्ष, संरक्षण और वापसी की कहानी प्रस्तुत की गई।

गोडावण एस्ट्यूरी प्रीमियम वॉटर के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को इस दुर्लभ पक्षी के संरक्षण के प्रति जागरूक करना और पर्यावरण संरक्षण के महत्व को समझाना था। प्रोजेक्शन शो में गोडावण की घटती संख्या, संरक्षण प्रयासों और उसके भविष्य की उम्मीदों को प्रभावशाली तरीके से प्रदर्शित किया गया।

गोडावण को कभी भारत का राष्ट्रीय पक्षी बनाए जाने पर भी विचार किया गया था, लेकिन देश के घास के मैदानों में इसके प्राकृतिक आवास के लगातार सिमटने और अन्य खतरों के कारण इसकी आबादी तेजी से घटती गई। परिणामस्वरूप यह पक्षी विलुप्ति के कगार पर पहुंच गया और आम लोगों की नजरों से लगभग ओझल हो गया। हालांकि हाल के वर्षों में केंद्र और राज्य सरकारों, वन विभाग, संरक्षण विशेषज्ञों और स्थानीय समुदायों के संयुक्त प्रयासों से इस दुर्लभ प्रजाति के संरक्षण में सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं।

हाल ही में नरेंद्र मोदी ने अपने कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 133वें एपिसोड में गोडावण का उल्लेख करते हुए इसे भारत में वन्यजीव संरक्षण के सफल प्रयासों और संकटग्रस्त प्रजातियों को बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बताया था। इसके बाद इस पक्षी को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली।

मई 2026 में राजस्थान ने पहली बार राज्य स्तर पर गोडावण दिवस मनाया। 21 मई को आयोजित इस विशेष दिवस का उद्देश्य गोडावण संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना और इस दिशा में चल रहे प्रयासों को समाज तक पहुंचाना था। इस दौरान वन्यजीव विभाग और संरक्षण संगठनों ने प्रजनन एवं हैचरी कार्यक्रमों में मिली सफलताओं की जानकारी साझा की। संरक्षित केंद्रों में गोडावण के नए चूजों के जन्म ने संरक्षण अभियान को नई ऊर्जा और उम्मीद प्रदान की है।

ग्रामोदय सामाजिक संस्थान के अध्यक्ष केदार श्रीमाल ने कहा कि इस पहल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि संरक्षण के लिए विभिन्न पक्ष एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं। स्थानीय समुदाय, संरक्षण विशेषज्ञ, निजी क्षेत्र, वन विभाग और अन्य सरकारी एजेंसियां मिलकर गोडावण और उसके प्राकृतिक आवास की सुरक्षा को मजबूत बना रहे हैं। ऐसे प्रयास न केवल जागरूकता बढ़ा रहे हैं, बल्कि इस दुर्लभ प्रजाति के बेहतर भविष्य की उम्मीद भी जगा रहे हैं।

गोडावण संरक्षण की सफलता के पीछे वैज्ञानिक अनुसंधान और स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी को प्रमुख कारण माना जा रहा है। संरक्षण एजेंसियों ने प्राकृतिक घास के मैदानों के पुनर्विकास, घोंसला स्थलों की सुरक्षा, जल स्रोतों की उपलब्धता बढ़ाने और प्रजनन कार्यक्रमों को मजबूत बनाने पर विशेष ध्यान दिया है। इसके साथ ही अंडों और चूजों की सुरक्षा के लिए विशेष परिवहन और हैचरी सुविधाओं का भी विकास किया गया है। शिकारी जीवों से होने वाले खतरे को कम करने के लिए भी कई प्रभावी कदम उठाए गए हैं।

इस अभियान में विशेष रूप से बिश्नोई समुदाय और गोडावण के प्रमुख आवास क्षेत्रों के आसपास रहने वाले लोगों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। इन लोगों ने वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञों के साथ मिलकर घोंसलों की निगरानी, प्रजनन स्थलों की सुरक्षा और पक्षियों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करने में उल्लेखनीय योगदान दिया है।

विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक पक्षी के संरक्षण का उत्सव नहीं था, बल्कि यह संदेश भी था कि यदि सरकार, वैज्ञानिक, सामाजिक संस्थाएं और स्थानीय समुदाय मिलकर कार्य करें तो विलुप्ति की कगार पर पहुंच चुकी प्रजातियों को भी बचाया जा सकता है। गोडावण की वापसी भारत में जैव विविधता संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।