NTPC कोरबा की अंतरिक्ष विज्ञान कार्यशाला से बालिकाओं को मिली नई उड़ान, इसरो वैज्ञानिक और अंतरिक्ष यात्री पायलट ने किया प्रेरित - vedantsamachar.in

NTPC कोरबा की अंतरिक्ष विज्ञान कार्यशाला से बालिकाओं को मिली नई उड़ान, इसरो वैज्ञानिक और अंतरिक्ष यात्री पायलट ने किया प्रेरित

कोरबा, 08 जून (वेदांत समाचार)। बालिका सशक्तिकरण अभियान (GEM) 2026 के तहत एनटीपीसी कोरबा द्वारा आयोजित दो दिवसीय अंतरिक्ष विज्ञान कार्यशाला ने युवा बालिकाओं के सपनों को नई दिशा दी। विज्ञान, तकनीक और अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में बालिकाओं की रुचि बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में उन्हें अंतरिक्ष विज्ञान की व्यवहारिक जानकारी देने के साथ-साथ देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष क्षेत्र की हस्तियों से सीधे संवाद का अवसर भी मिला।

एनटीपीसी कोरबा ने यह कार्यक्रम इग्नाइटिंग ड्रीम्स ऑफ यंग माइंड्स (IDYM) फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित किया। यह संस्था इसरो-पंजीकृत स्पेस ट्यूटर संगठन है, जो विद्यार्थियों के बीच अंतरिक्ष शिक्षा और नवाचार को बढ़ावा देने का कार्य करती है। “प्रेरित हों, सीखें, नेतृत्व करें और उपलब्धि प्राप्त करें” थीम पर आधारित इस कार्यशाला में प्रतिभागियों को विज्ञान और नेतृत्व के विभिन्न पहलुओं से परिचित कराया गया।

कार्यक्रम के पहले दिन बालिकाओं को अंतरिक्ष विज्ञान और रॉकेट तकनीक की दुनिया से अवगत कराया गया। विशेषज्ञों ने उन्हें अंतरिक्ष, उपग्रह प्रौद्योगिकी, प्रक्षेपण यानों और रॉकेट प्रणोदन प्रणालियों की विस्तृत जानकारी दी। विशेष रूप से तैयार की गई स्पेस प्रदर्शनी में छात्राओं ने उपग्रहों, रॉकेटों और भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की महत्वपूर्ण उपलब्धियों के बारे में जाना।

कार्यक्रम का सबसे रोमांचक हिस्सा वॉटर रॉकेट चैलेंज रहा। इस गतिविधि में बालिकाओं ने विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में जल रॉकेटों का डिजाइन तैयार किया, उनका निर्माण किया और सफलतापूर्वक प्रक्षेपण भी किया। इस दौरान उन्होंने थ्रस्ट, वायु दाब, एयरोडायनेमिक्स और उड़ान स्थिरता जैसे वैज्ञानिक सिद्धांतों की व्यवहारिक समझ विकसित की।

कार्यशाला के दूसरे दिन प्रतिभागियों को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की वरिष्ठ वैज्ञानिक अंजू दामोदरन से संवाद का अवसर मिला। अंतरिक्ष क्षेत्र में 28 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाली अंजू दामोदरन वर्तमान में यू.आर. राव सैटेलाइट सेंटर, बेंगलुरु में उपग्रह एकीकरण की उप परियोजना निदेशक और विद्युत एकीकरण अनुभाग-II की प्रमुख के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने छात्राओं को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी और गणित (STEM) के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि विज्ञान में सफलता के लिए जिज्ञासा, मेहनत और दृढ़ संकल्प सबसे महत्वपूर्ण हैं।

कार्यक्रम में एक्सिओम मिशन-4 के अंतरिक्ष यात्री पायलट और भारतीय वायुसेना के अधिकारी ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने भी बालिकाओं से संवाद किया। उन्होंने अपने विमानन और अंतरिक्ष अन्वेषण से जुड़े अनुभव साझा करते हुए अनुशासन, साहस, धैर्य और नेतृत्व क्षमता के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने छात्राओं को बड़े सपने देखने और अपनी क्षमताओं पर विश्वास रखने का संदेश दिया।

दूसरे दिन आयोजित मॉडल रॉकेट्री कार्यशाला में प्रतिभागियों ने मॉडल रॉकेटों का डिजाइन तैयार किया और विशेषज्ञों की निगरानी में उनका निर्माण किया। कार्यशाला का समापन एनटीपीसी कोरबा के व्यवसाय इकाई प्रमुख किशोर चंद्र पात्र की उपस्थिति में मॉडल रॉकेटों के सफल प्रक्षेपण के साथ हुआ, जिसने छात्राओं के उत्साह को और बढ़ा दिया।

एनटीपीसी कोरबा का यह आयोजन केवल विज्ञान शिक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने बालिकाओं में आत्मविश्वास, नवाचार, नेतृत्व, संचार कौशल और धैर्य जैसे गुणों को भी मजबूत किया। कार्यक्रम के दौरान उन्हें रूढ़िवादी सोच को चुनौती देने, उच्च शिक्षा प्राप्त करने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रेरित किया गया।

कार्यक्रम का समापन जेम प्रतिज्ञा के साथ हुआ, जिसमें सभी प्रतिभागियों ने बड़े सपने देखने, निरंतर सीखने, आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने और समाज व देश के विकास में सकारात्मक भूमिका निभाने का संकल्प लिया। एनटीपीसी कोरबा की यह पहल बालिका सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जो आने वाले समय में विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में नई महिला नेतृत्वकर्ताओं को तैयार करने में सहायक साबित होगी।

“आज की जेम बालिका, कल की राष्ट्र-निर्माता” के संदेश के साथ संपन्न यह कार्यक्रम बालिकाओं के उज्ज्वल भविष्य की नई उम्मीद बनकर उभरा।