क्या सोनी सब के ‘हस्तिनापुर के वीर में’ युधिष्ठिर की बुद्धिमत्ता दुर्योधन की चालों पर भारी पड़ेगी? - vedantsamachar.in

क्या सोनी सब के ‘हस्तिनापुर के वीर में’ युधिष्ठिर की बुद्धिमत्ता दुर्योधन की चालों पर भारी पड़ेगी?

मुंबई, 04 जून, 2026: सोनी सब अपने दर्शकों को लेकर आ रहा है भव्य पौराणिक ड्रामा हस्तिनापुर के वीर, जिसका प्रीमियर आज रात 9:00 बजे होगा। महाभारत की अमर गाथा पर आधारित यह शो पांडवों और कौरवों के शुरुआती वर्षों को दिखाता है, जहाँ उनकी किस्मतें तय होती हैं और इतिहास की सबसे बड़ी कहानी की नींव रखी जाती है।

ओपनिंग वीक में दर्शक देखेंगे कि कुंती (तोरल रसपुत्रा) और पांडव (युधिष्ठिर – अथर खान, भीम – सुभाष, अर्जुन – उर्वा सवालिया, नकुल – हरित गबानी और सहदेव – मयंक यादव) लंबे वनवास के बाद हस्तिनापुर लौटते हैं।पांडवों को समझदार, अनुशासित और ज़मीन से जुड़े हुए दिखाया गया है, जबकि दुर्योधन (अय्युध भानुशाली), जो शकुनि (चंदन आनंद) के प्रभाव में है, उन्हें अपने सिंहासन के दावे के लिए खतरा मानता है। दुर्योधन उनकी राजसभा में औपचारिक प्रस्तुति के दौरान उन्हें अपमानित करने की योजना बनाता है। जब कुंती और उसके बेटे पूरे दरबार के सामने अपमानित होते हैं, तब युधिष्ठिर अपनी बुद्धिमत्ता और संयम से हालात को अप्रत्याशित तरीके से संभालते हैं। उनकी समझदारी और धैर्य इस अपमान को गर्व के पल में बदल देती है।

क्या युधिष्ठिर की बुद्धिमत्ता हस्तिनापुर में पांडवों की छवि बदलने के लिए काफी होगी?

कुंती का किरदार निभा रहीं तोरल रसपुत्रा ने कहा, “एक माँ के रूप में कुंती की सबसे बड़ी ताकत उन मूल्यों में है, जो वह अपने बच्चों को देती है। इतने संघर्षों के बाद हस्तिनापुर लौटना उनके लिए एक नई शुरुआत है। लेकिन, जब पूरे दरबार के सामने पांडवों का मज़ाक उड़ाया जाता है, तो यह उनके लिए बेहद दुखद है। इस सीन की खासियत यह है कि युधिष्ठिर गुस्से से नहीं, बल्कि परिपक्वता और बुद्धिमत्ता से जवाब देते हैं। वे अपमान के पल को गर्व के पल में बदल देते हैं। एक माँ के तौर पर ऐसे कई पल आते हैं, जब आप चुपचाप उम्मीद करते हैं कि आपके बच्चे वे मूल्य याद रखें जो आपने उन्हें सिखाए हैं और कुंती के लिए यह वही पल है।”

देखिए हस्तिनापुर के वीर, हर सोमवार से शनिवार रात 9 बजे, सिर्फ सोनी सब पर।