सस्टेनेबल माइन क्लोजर पर एसईसीएल का फोकस: सीएमडी हरीश दुहन ने जामुना ओसी में कार्यों की समीक्षा की, इको पार्क और वाटर एडवेंचर पार्क विकसित करने के दिए निर्देश - vedantsamachar.in

सस्टेनेबल माइन क्लोजर पर एसईसीएल का फोकस: सीएमडी हरीश दुहन ने जामुना ओसी में कार्यों की समीक्षा की, इको पार्क और वाटर एडवेंचर पार्क विकसित करने के दिए निर्देश

अनूपपुर/जामुना, 30 मई (वेदांत समाचार)। कोयला मंत्रालय द्वारा वैज्ञानिक माइन क्लोजर और खनन भूमि के पुनरूपयोग (लैंड रिपर्पजिंग) पर दिए जा रहे विशेष जोर के बीच साऊथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) ने इस दिशा में अपनी गतिविधियों को और तेज कर दिया है। इसी क्रम में एसईसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक (सीएमडी) हरीश दुहन ने शनिवार को जामुना-कोतमा क्षेत्र स्थित जामुना ओपनकास्ट खदान के बंद और परित्यक्त खदान क्षेत्रों का दौरा कर वहां संचालित माइन क्लोजर एवं भूमि पुनरूपयोग कार्यों की विस्तृत समीक्षा की।

निरीक्षण के दौरान सीएमडी ने माइन क्लोजर प्लान (एमसीपी) के तहत हरड़ पैच में किए जा रहे ऐश फिलिंग, टॉप सॉइल स्प्रेडिंग और बायोलॉजिकल रिक्लेमेशन कार्यों का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी कार्य निर्धारित पर्यावरणीय मानकों और दिशा-निर्देशों के अनुरूप तय समय-सीमा में पूरे किए जाएं, ताकि बंद हो चुकी खदानों को उपयोगी और पर्यावरण अनुकूल क्षेत्रों में बदला जा सके।

दौरे के दौरान श्री दुहन ने दैखाल पैच में विकसित विशाल जलाशय (वाटर बॉडी) का भी निरीक्षण किया। उन्होंने इस जलाशय के दीर्घकालिक और बहुउद्देशीय उपयोग की संभावनाओं पर चर्चा करते हुए क्षेत्रीय प्रबंधन को व्यापक “रिवर्स मार्केट सर्वे” कराने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने यहां इंटीग्रेटेड इको पार्क और वाटर एडवेंचर पार्क विकसित करने के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (ईओआई) आमंत्रित करने को कहा।

सीएमडी ने स्थानीय समुदायों के लिए स्थायी आजीविका के अवसर बढ़ाने पर विशेष बल देते हुए मत्स्य पालन गतिविधियों के विस्तार के निर्देश भी दिए। उनका मानना है कि खदानों से विकसित जलाशयों का उपयोग मत्स्य पालन और पर्यटन जैसी गतिविधियों में कर स्थानीय लोगों को रोजगार और आय के नए अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं।

श्री दुहन ने छोहरी पैच और ग्राम बदरा स्थित आम वाटिका का भी निरीक्षण किया, जहां रिक्लेम्ड भूमि और खदान के पानी का उपयोग कृषि एवं उद्यानिकी गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। उन्होंने किसानों द्वारा तरबूज, आम, कटहल, आंवला और अमरूद जैसी फसलों एवं फलदार पौधों की सफल खेती की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह मॉडल न केवल पर्यावरण संरक्षण का उदाहरण है, बल्कि स्थानीय लोगों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

इस अवसर पर सीएमडी हरीश दुहन ने कहा कि माइन क्लोजर को केवल एक नियामकीय प्रक्रिया के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे पर्यावरण संरक्षण, सामुदायिक विकास और दीर्घकालिक मूल्य सृजन के अवसर के रूप में अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उचित योजना और प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से रिक्लेम्ड खनन भूमि को ग्रीन स्पेस, जलाशय, इको-टूरिज्म केंद्र, कृषि हब और आजीविका केंद्रों के रूप में विकसित किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि एसईसीएल देश में सस्टेनेबल माइनिंग और पोस्ट-माइनिंग लैंड डेवलपमेंट के क्षेत्र में एक मॉडल स्थापित करने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। कंपनी विभिन्न परियोजनाओं के माध्यम से प्रोग्रेसिव माइन क्लोजर, पारिस्थितिकीय पुनर्स्थापन (इकोलॉजिकल रिस्टोरेशन), वनीकरण, जल संसाधन विकास और समुदाय आधारित विकास कार्यों को बढ़ावा दे रही है।

एसईसीएल का यह प्रयास बंद हो चुकी खदानों को नए स्वरूप में विकसित कर उन्हें पर्यावरण संरक्षण, पर्यटन, कृषि और रोजगार सृजन के केंद्रों में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।