KORBA BREAKING:दीपका उपचुनाव में नामांकन विवाद: प्रत्याशी ने खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा, नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल - vedantsamachar.in

KORBA BREAKING:दीपका उपचुनाव में नामांकन विवाद: प्रत्याशी ने खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा, नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

कोरबा,30 मई (वेदांत समाचार)। नगर पालिका परिषद दीपका के वार्ड क्रमांक 15 में होने वाले उपचुनाव से पहले राजनीतिक माहौल गर्मा गया है। नामांकन पत्र स्वीकार नहीं किए जाने से नाराज संभावित प्रत्याशी शोभा तिग्गा ने मामले को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की शरण ली है। याचिका में नगर पालिका प्रशासन पर मनमानी करने और चुनाव लड़ने के लोकतांत्रिक अधिकार में बाधा पहुंचाने का आरोप लगाया गया है।

अधिवक्ता अंशुल तिवारी के माध्यम से दायर याचिका में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सचिव, राज्य निर्वाचन आयोग, जिला निर्वाचन अधिकारी कोरबा, मुख्य नगर पालिका अधिकारी दीपका तथा रिटर्निंग ऑफिसर को प्रतिवादी बनाया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि उन्होंने चुनाव लड़ने के लिए निर्धारित सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर ली थीं, लेकिन नामांकन जमा करने के अंतिम दिन उनसे एक ऐसे दस्तावेज की मांग की गई जिसका चुनावी नियमों में कोई उल्लेख नहीं है।

याचिका के अनुसार, वर्ष 2021 में नगर पालिका की चौपाटी स्थित दुकान क्रमांक 06 के संचालन से जुड़े मामले में नगर पालिका द्वारा एनओसी या पंचनामा प्रस्तुत करने की शर्त रखी गई। शोभा तिग्गा का दावा है कि दुकान से संबंधित सभी देनदारियों का भुगतान वर्षों पहले किया जा चुका है और उनके खिलाफ किसी प्रकार का बकाया, रिकवरी या कानूनी कार्रवाई लंबित नहीं है। इसके बावजूद एनओसी की मांग कर नामांकन प्रक्रिया को प्रभावित किया गया।

याचिका में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ नगर पालिका अधिनियम, 1961 की धारा 35 के तहत उनकी उम्मीदवारी पर कोई वैधानिक रोक नहीं है। ऐसे में अतिरिक्त दस्तावेज मांगना न केवल नियमों के विपरीत है, बल्कि प्राकृतिक न्याय और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया की भावना के भी खिलाफ है। याचिकाकर्ता ने इसे अधिकारों के हनन और प्रशासनिक शक्तियों के दुरुपयोग का मामला बताया है।

शोभा तिग्गा ने हाईकोर्ट से 18 मई 2026 को जारी विवादित पत्र को निरस्त करने तथा बिना किसी गैरकानूनी शर्त के उनका नामांकन स्वीकार करने का निर्देश जारी करने की मांग की है। वार्ड क्रमांक 15 में 1 जून को मतदान और 4 जून को मतगणना प्रस्तावित है। ऐसे में इस मामले पर हाईकोर्ट का फैसला उपचुनाव की दिशा और तस्वीर दोनों को प्रभावित कर सकता है।

राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस मामले की चर्चा तेज हो गई है। अब सभी की निगाहें हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि नामांकन प्रक्रिया में अपनाई गई कार्रवाई नियमसम्मत थी या फिर प्रत्याशी के साथ वास्तव में अन्याय हुआ है।