कोरबा, 29 मई (वेदांत समाचार)। पर्यावरण संरक्षण और ईंधन बचत को बढ़ावा देने की दिशा में साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) ने बड़ा कदम उठाया है। कार्यालयों में चार पहिया इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग के बाद अब एसईसीएल की खदानों में भी इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ाया जा रहा है। कई खदानों में ईवी टिपर के जरिए कोयले की ढुलाई शुरू हो चुकी है और आने वाले समय में सभी खदानों में इस व्यवस्था को लागू करने की तैयारी की जा रही है।
एसईसीएल ने हाल ही में जारी किए गए टेंडर में 20 प्रतिशत इलेक्ट्रिक और सीएनजी वाहनों को शामिल करना अनिवार्य कर दिया है। 8 मई 2026 को जारी टेंडर में यह शर्त जोड़ी गई है, जिससे अब खदानों में होने वाले परिवहन और अन्य कार्यों में ईवी वाहनों की हिस्सेदारी बढ़ेगी। कंपनी का मानना है कि इससे डीजल पर निर्भरता कम होगी और हरित खनन को बढ़ावा मिलेगा।
कोल इंडिया की नई गाइडलाइन के तहत आधिकारिक कार पूलिंग को भी अनिवार्य किया गया है। इसके अनुसार एक ही दिशा में निरीक्षण या विभागीय कार्य के लिए जाने वाले अधिकारियों को साझा वाहन का उपयोग करना होगा। डीजल और पेट्रोल वाहनों की बजाय इलेक्ट्रिक वाहनों को प्राथमिकता देने के निर्देश सभी सहायक कंपनियों और विभागाध्यक्षों को दिए गए हैं। शेष वाहनों को कॉमन पूल में रखने की व्यवस्था बनाई जा रही है।
एसईसीएल की खदानों में कोयला उत्पादन, मिट्टी ढुलाई और अन्य खनन कार्यों में भारी मशीनों और वाहनों का इस्तेमाल होता है। वर्तमान में अधिकांश वाहन डीजल आधारित हैं, लेकिन अब ईवी टिपर को शामिल कर धीरे-धीरे परिवहन व्यवस्था को हरित तकनीक की ओर ले जाया जा रहा है। इससे न केवल ईंधन की बचत होगी बल्कि कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी।
जानकारों के अनुसार अमेरिका-ईरान तनाव और वैश्विक परिस्थितियों के कारण डीजल की सप्लाई चैन प्रभावित हुई है। हालांकि फिलहाल जिले में तेल संकट जैसी स्थिति नहीं है, लेकिन भविष्य में संभावित डीजल किल्लत को देखते हुए एसईसीएल ने वैकल्पिक ऊर्जा आधारित वाहनों के उपयोग पर विशेष जोर देना शुरू किया है। इसका असर खदानों में कार्यरत ठेका कंपनियों के संचालन मॉडल पर भी दिखाई देने लगा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश में पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने की अपील के बाद कोल इंडिया ने सभी अनुषंगी कंपनियों के लिए ईवी टिपर की तैनाती और आधिकारिक कार पूलिंग को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है। इसी के तहत एसईसीएल ने भी अपने टेंडर और संचालन व्यवस्था में बदलाव किया है।
एसईसीएल के अधिकारियों का कहना है कि कंपनी पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। खदानों में इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देना स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल और पर्यावरण-अनुकूल खनन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। आने वाले वर्षों में एसईसीएल की सभी प्रमुख परियोजनाओं में ईवी आधारित परिवहन व्यवस्था लागू किए जाने की योजना है।

