भारत के सबसे बड़े निजी बैंकों में शामिल HDFC Bank एक नए विवाद में घिर गया है. मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि बैंक की ऑडिट कमेटी ने 45 करोड़ रुपये के संदिग्ध भुगतान को लेकर आंतरिक जांच शुरू की है. इस खबर के बाद बुधवार को बैंक के शेयर करीब 2 फीसदी तक टूट गए.
मार्केटिंग खर्च के नाम पर हुआ भुगतान
रिपोर्ट के अनुसार, यह रकम महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) को दी गई थी. आरोप है कि बैंक ने अतिरिक्त ब्याज भुगतान को सीधे देने के बजाय उसे मार्केटिंग खर्च के रूप में दिखाया. इसके लिए रोड सेफ्टी अवेयरनेस कैंपेन का सहारा लिया गया और चार स्थानीय वेंडर्स के जरिए भुगतान किया गया. बैंक के आंतरिक ऑडिट में FY25 के दौरान हुए इन भुगतानों पर सवाल उठाए गए थे. जांच में मार्केटिंग विभाग के कामकाज को असंतोषजनक बताया गया.
6.01% रिटर्न देने का था वादा
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 2021 में HDFC Bank ने MSRDC के बड़े डिपॉजिट आकर्षित करने की कोशिश की थी. उस समय बैंक सेविंग अकाउंट पर 3.5% ब्याज दे रहा था, जबकि दूसरी संस्थाएं 6% से अधिक रिटर्न ऑफर कर रही थीं. बताया गया कि MSRDC ने कम से कम 6.01% रिटर्न की मांग की थी.
बैंक ने कुछ समय के लिए 4.5% की विशेष ब्याज दर लागू की, लेकिन बाद में इसे बंद कर दिया गया. इसके बाद वादा किए गए रिटर्न और वास्तविक ब्याज दर के बीच के अंतर को दूसरे तरीके से चुकाने की योजना बनाई गई.
जांच में बड़े अधिकारियों के नाम
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बैंक के सीईओ शशिधर जगदीशन् भी इस मामले से जुड़ी चर्चाओं में शामिल थे. वहीं, बैंक के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर रवि संथानम ने जांच में माना कि मार्केटिंग विभाग ने इस भुगतान को मार्केटिंग खर्च की तरह दिखाने में भूमिका निभाई.
RBI नियमों के उल्लंघन का आरोप
जांच रिपोर्ट में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के उल्लंघन की बात कही गई है. रिपोर्ट के अनुसार, किसी एक ग्राहक को अलग से तय अतिरिक्त ब्याज देना नियमों के खिलाफ हो सकता है. इस विवाद के बीच बैंक के पूर्व चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे को भी अहम माना जा रहा है. खबरों के मुताबिक, 2026 में अब तक HDFC Bank के शेयर करीब 23 फीसदी गिर चुके हैं.

