कोरबा,23 मई (वेदांत समाचार)। जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पाली में मासूम बच्चे को जमीन पर लिटाकर सलाइन चढ़ाने के वायरल मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। वीडियो सोशल मीडिया में सामने आने और खबर प्रकाशित होने के बाद अब एक कथित कॉल रिकॉर्डिंग ऑडियो वायरल हुआ है, जिसने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि अस्पताल की बदहाल व्यवस्था उजागर करने के बाद उन्हें लगातार फोन कर दबाव बनाया जा रहा है। परिवार का कहना है कि बच्चे की हालत सामान्य होने के बावजूद अस्पताल से डिस्चार्ज नहीं दिया जा रहा और कथित तौर पर धमकी भरे अंदाज में बातचीत की जा रही है।
वायरल ऑडियो में कथित रूप से स्वास्थ्य कर्मी सख्त लहजे में बात करते सुनाई दे रहे हैं। परिवार का आरोप है कि उनसे कहा गया कि सरकारी अस्पताल का वीडियो इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर वायरल करने की वजह से अब उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और थाने में शिकायत दर्ज कराने तक की बात कही गई।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या सरकारी अस्पताल की अव्यवस्था उजागर करना अपराध है? क्या गरीब परिवार अपने बीमार मासूम को जमीन पर तड़पता देखकर भी चुप रहे? क्या स्वास्थ्य विभाग अपनी कमियों को सुधारने के बजाय अब शिकायत करने वालों पर दबाव बनाने में जुट गया है?
एक ओर सरकार “सुशासन तिहार” के माध्यम से संवेदनशील और जवाबदेह प्रशासन के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर पाली अस्पताल का मामला उन दावों की हकीकत बयां करता नजर आ रहा है। जहां एक मासूम को जमीन पर इलाज मिलता है और शिकायत के बाद परिवार को कथित धमकियां झेलनी पड़ती हैं, वहां व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
मामला सोशल मीडिया में लगातार वायरल होने और वीडियो-ऑडियो सामने आने के बावजूद अब तक किसी बड़े अधिकारी की ओर से स्पष्ट कार्रवाई सामने नहीं आई है। इस संबंध में जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कोरबा डॉ. एस.एन. केसरी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।
अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या स्वास्थ्य विभाग निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करेगा या फिर यह मामला भी दबाने की कोशिशों में उलझकर रह जाएगा।

