मंदिरों और वट वृक्षों के पास उमड़ी महिलाओं की भीड़, 108 बार रक्षा सूत्र बांधकर की पूजा-अर्चना
कोरबा 16 मई 2026। जिलेभर में शुक्रवार को वट सावित्री व्रत श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया गया। सुहागिन महिलाओं ने अपने पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करते हुए वट वृक्ष की पूजा-अर्चना की। सुबह से ही शहर और उपनगरीय क्षेत्रों के मंदिरों एवं वट वृक्षों के आसपास महिलाओं की भारी भीड़ देखने को मिली। पारंपरिक वेशभूषा में सजी-धजी महिलाएं पूजा की थाल लेकर मंदिरों और पेड़ों के पास पहुंचीं तथा विधि-विधान से पूजा संपन्न की।शहर के सीतामणी मुख्य मार्ग, सप्तदेव मंदिर, पुराना बस स्टैंड, टीपी नगर और राम मंदिर परिसर में सुबह से महिलाओं का तांता लगा रहा। महिलाओं ने वट वृक्ष के चारों ओर 108 बार रक्षा सूत्र बांधकर पूजा की और अखंड सौभाग्य की कामना की। कई महिलाओं ने व्रत कथा का श्रवण भी किया। मंदिरों में धार्मिक वातावरण बना रहा और पूजा के दौरान भक्ति गीतों की गूंज सुनाई देती रही।

पंडित महात्मा प्रसाद तिवारी ने बताया कि वट सावित्री व्रत भारतीय संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। मान्यता है कि माता सावित्री ने अपने तप और संकल्प से अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से वापस प्राप्त किए थे। इसी कारण महिलाएं यह व्रत रखकर पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करती हैं।
सीतामणी निवासी ईश्वरी यादव ने बताया कि वह पिछले नौ वर्षों से यह व्रत कर रही हैं। उनके अनुसार इस पूजा से उन्हें आत्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। वहीं भिलाई खुर्द की पूजा ने कहा कि वह पूरे वर्ष इस पर्व का इंतजार करती हैं और एक दिन पहले से ही मेहंदी लगाकर तथा पूजा सामग्री जुटाकर तैयारी शुरू कर देती हैं।
उपनगरीय क्षेत्रों कुसमुंडा, दीपका, गेवरा और एसईसीएल कॉलोनियों में भी वट सावित्री व्रत को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। दीपका के शिव मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। एसईसीएल प्रगति नगर कॉलोनी में महिलाओं ने वट वृक्ष के नीचे आकर्षक सजावट कर सामूहिक पूजा की। महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा कर परिवार की खुशहाली की कामना की।

गेवरा बस्ती की गौरी मंडल ने बताया कि यह पर्व केवल पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवार के प्रति समर्पण और भारतीय परंपरा का प्रतीक भी है। कुसमुंडा की मीना प्रसाद ने कहा कि वट सावित्री व्रत महिलाओं की आस्था और विश्वास का सबसे बड़ा पर्व है, जिसे हर वर्ष पूरे उत्साह के साथ मनाया जाता है। वहीं कोरबा की ललिता सिंह ने बताया कि इस दिन महिलाएं पूरे दिन उपवास रखकर पति और परिवार के सुखद जीवन की कामना करती हैं।
महिलाओं ने बताया कि बदलते समय के बावजूद वट सावित्री व्रत की परंपरा आज भी पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाई जा रही है। युवा पीढ़ी की महिलाएं भी इस पर्व से जुड़ रही हैं, जिससे भारतीय संस्कृति और पारिवारिक परंपराएं लगातार मजबूत हो रही हैं।

