आज के समय में आधुनिक कारों में मिलने वाला कीलेस एंट्री फीचर लोगों की जिंदगी को काफी आसान बना चुका है. अब कार खोलने या स्टार्ट करने के लिए बार-बार चाबी निकालने की जरूरत नहीं पड़ती. बस चाबी पास होनी चाहिए और कार खुद उसे पहचानकर अनलॉक हो जाती है. हालांकि सुविधा देने वाली यही तकनीक अब कार मालिकों के लिए चिंता की वजह भी बन रही है.
दुनिया भर में, खासकर अमेरिका और यूरोप जैसे देशों में, कार चोरी के कई मामलों में कीलेस एंट्री सिस्टम का गलत इस्तेमाल सामने आया है. यही कारण है कि अब लोग अपनी कार की चाबी को एल्युमिनियम फॉइल में लपेटकर रखने लगे हैं. सुनने में ये तरीका थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन इसके पीछे साइंस और सुरक्षा दोनों छिपे हैं.
कैसे काम करती है कीलेस एंट्री तकनीक?
कीलेस एंट्री वाली कारें वायरलेस रेडियो सिग्नल के जरिए चाबी से जुड़ी रहती हैं. जैसे ही चाबी कार के आसपास आती है, वाहन उस सिग्नल को पहचान लेता है और अपने आप लॉक खुल जाता है. यही वजह है कि आपको चाबी को लॉक में लगाने की जरूरत नहीं पड़ती.
लेकिन साइबर अपराधी इसी तकनीक का फायदा उठाने लगे हैं. वो रिले अटैक नाम की तकनीक का इस्तेमाल करते हैं. इसमें दो इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की मदद से कार की चाबी के सिग्नल को लंबी दूरी तक पहुंचाया जाता है. अगर आपकी चाबी घर के अंदर भी रखी हो, तो चोर उसका सिग्नल पकड़कर कार तक पहुंचा सकते हैं. कार को लगता है कि असली चाबी पास में मौजूद है और वो आसानी से खुल जाती है. कई बार चोर बिना किसी नुकसान के कुछ ही मिनटों में कार लेकर फरार हो जाते हैं.
एल्युमिनियम फॉइल क्यों बन रहा है सुरक्षा कवच?
इसी खतरे से बचने के लिए लोग एक आसान घरेलू तरीका अपना रहे हैं कार की चाबी को एल्युमिनियम फॉइल में लपेटना. ये तरीका फैराडे केज सिद्धांत पर बेस्ड है. एल्युमिनियम जैसी धातुएं इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सिग्नल को बाहर जाने से रोक सकती हैं.
जब चाबी पूरी तरह फॉइल में ढक जाती है, तो उसका वायरलेस सिग्नल ब्लॉक हो जाता है. इसका मतलब ये है कि रिले अटैक करने वाले डिवाइस चाबी का सिग्नल पकड़ नहीं पाते और कार सुरक्षित रहती है. आप चाहें तो खुद भी इसे टेस्ट कर सकते हैं. चाबी को फॉइल में लपेटकर कार के पास जाएं, अगर कार अनलॉक नहीं होती तो समझिए तरीका काम कर रहा है.

