डीएमएफऔर 15वें वित्त की रकम पर कब्जे के आरोप – vedantsamachar.in

डीएमएफऔर 15वें वित्त की रकम पर कब्जे के आरोप

जांजगीर-चांपा 8 मई 2026 । जिला पंचायत में भडक़ा विवाद अब अपने असली कारण के साथ खुलकर सामने आ गया है-योजनाओं की राशि का पक्षपातपूर्ण बंटवारा। अंदरखाने लंबे समय से सुलग रही नाराजगी अब खुली बगावत में बदल चुकी है, और इसकी जड़ में है डीएमएफ (जिला खनिज न्यास) और 15वें वित्त आयोग के फंड का कथित असमान वितरण।
चूंकि, आरोप बेहद गंभीर हैं। कहा जा रहा है कि अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के क्षेत्रों में योजनाओं का खजाना खोल दिया गया, जहां पीडीएस गोदाम निर्माण से लेकर दर्जनों काम धड़ाधड़ स्वीकृत हुए। इन इलाकों में विकास कार्यों की झड़ी लग गई, मानो योजनाओं की कोई कमी ही न हो। वहीं दूसरी ओर, कई अन्य जिला पंचायत सदस्यों के क्षेत्र ऐसे हैं जहां छोटे-छोटे विकास कार्यों के लिए भी फंड के लाले पड़े हुए हैं। जनप्रतिनिधियों को अपने ही क्षेत्र में काम कराने के लिए भटकना पड़ रहा है। नाराज सदस्यों का सीधा आरोप है कि फंड का वितरण पारदर्शिता से नहीं, बल्कि पसंद-नापसंद के आधार पर किया गया। यही वजह है कि कुछ क्षेत्रों में विकास दौड़ रहा है, जबकि बाकी इलाके ठप पड़े हैं। यह असंतुलन केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि सत्ता के केंद्रीकरण और संसाधनों पर नियंत्रण की राजनीति का उदाहरण बताया जा रहा है।
अब हालात सीधे अविश्वास प्रस्ताव तक
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह विवाद अचानक नहीं फूटा है। पहले बैठकों में सवाल उठे, फिर बहस हुई, उसके बाद टकराव हुआ और अब हालात सीधे अविश्वास प्रस्ताव तक पहुंच गए हैं। यानी यह लड़ाई अब केवल बोलने या न बोलने की नहीं, बल्कि कौन विकास करेगा और किसके हिस्से में फंड आएगा इस मूल सवाल की लड़ाई बन चुकी है।
सत्ता पक्ष के भीतर ही उबल रहा असंतोष
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह असंतोष विपक्ष तक सीमित नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष के भीतर ही उबल रहा है। जब अपने ही सदस्य खुलकर सवाल उठाने लगें, तो यह साफसंकेत है कि मामला बेहद गंभीर हो चुका है। अब तस्वीर बिल्कुल साफहै कि यह विवाद प्रक्रिया का नहीं, पैसे और हिस्सेदारी का है। और जब मामला फंड और सत्ता के संतुलन पर आ जाए, तो राजनीति में हलचल तय मानी जाती है।