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कोयला कर्मियों का बोनस अधर में, त्यौहार पर बढ़ी चिंता

कोरबा। त्योहार के मौसम में कोयला कर्मियों के बोनस पर छाए अनिश्चितता के बादल गहराते जा रहे हैं। कोलकाता हाई कोर्ट ने मानकीकरण समिति की बैठक पर रोक लगाते हुए अगले आदेश तक निर्णय स्थगित कर दिया है। इसके चलते करीब 2 लाख 20 हजार स्थायी कोयला कर्मचारी और लाखों ठेका श्रमिक बोनस से वंचित होने की स्थिति में आ गए हैं।

सूत्रों के अनुसार, दिल्ली में मानकीकरण समिति की बैठक बुलाई गई थी जिसमें विभिन्न केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधि शामिल होने वाले थे। लेकिन अदालत में चल रही कानूनी जटिलताओं के कारण बैठक स्थगित करनी पड़ी। कोलकाता हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने पूर्व में आदेश दिया था कि समिति में इंटक (INTUC) को शामिल किया जाए। किंतु केंद्र सरकार और भारतीय मजदूर संघ (BMS) के दबाव में प्रबंधन ने इस फैसले को चुनौती देते हुए डबल बेंच का दरवाज़ा खटखटाया। डबल बेंच ने भी सिंगल बेंच का आदेश बरकरार रखते हुए बैठक पर रोक जारी रखी।

इस स्थिति का सीधा असर बीसीसीएल, सीसीएल, ईसीएल और सीएमपीडीआइ जैसे प्रमुख कोल कंपनियों पर कार्यरत श्रमिकों पर पड़ा है। अकेले धनबाद में कार्यरत लगभग 42 हजार कर्मचारियों के बोनस की संभावना फिलहाल अधर में लटक गई है। परंपरागत रूप से दशहरा-दीवाली के अवसर पर बोनस कोयला कर्मियों के लिए बड़ा सहारा होता है। लेकिन इस बार बोनस पर रोक ने कर्मचारियों की चिंता बढ़ा दी है।

एचएमएस (HMS) नेता सुरेंद्र मिश्रा ने कहा कि श्रमिकों के साथ अन्याय हो रहा है। त्यौहार के अवसर पर बोनस न मिलना गहरी पीड़ा का विषय है। उन्होंने प्रबंधन से मांग की है कि दशहरा पूर्व प्रत्येक श्रमिक को एडवांस के रूप में कम से कम एक-एक लाख रुपये प्रदान किए जाएं, ताकि वे अपने परिवार के साथ उत्सव मना सकें।

इधर, ट्रेड यूनियनों का कहना है कि बोनस को लेकर लगातार अनिश्चितता बनाए रखना सरकार और प्रबंधन की श्रमिक विरोधी नीति को दर्शाता है। यूनियन प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही कोई ठोस समाधान नहीं निकला, तो आंदोलन की राह अपनानी पड़ सकती है।

त्योहारों के समय बोनस पर यह रोक न केवल कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित कर रही है, बल्कि उनके परिवार की खुशियों पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

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