क्या आपका बच्चा भी मोबाइल स्क्रीन में इतना खो गया है कि वह एक तरह से स्क्रीन जॉम्बी (Screen Zombie) बनता जा रहा है? आज की जेनरेशन ज्यादातर समय रील्स, वीडियो और अंतहीन स्क्रॉलिंग में गुजार रही है। मोबाइल हर समय बच्चों के हाथ में रहता है, जिसका असर उनकी शारीरिक और मानसिक सेहत पर गंभीर रूप से पड़ता है। कई बच्चे तनाव, चिंता और सामाजिक दूरी जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं।
बच्चों पर स्क्रीन की अधिकता का असर
- गहरी और स्थायी दोस्ती नहीं बन पाती, जो उनके भावनात्मक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
- खेल-कूद से दूरी बढ़ती है, जिससे फिजिकल और मेंटल डेवलपमेंट प्रभावित होता है।
- कम्प्लसिव बिहेवियर और स्क्रीन एडिक्शन का खतरा बढ़ जाता है।
- बच्चे भीतर से अकेलापन महसूस करने लगते हैं।
ये ऑफलाइन एक्टिविटीज कर सकती हैं बच्चों की मदद
पढ़ने की आदत विकसित करना
किताबें बच्चों को एक नई दुनिया दिखाती हैं। शोध बताते हैं कि फिक्शन पढ़ने से बच्चों में संवेदनशीलता और समझ बढ़ती है।
दोस्तों से आमने-सामने मिलना
ऑनलाइन चैट की जगह बच्चों को दोस्तों से मिलकर समय बिताने के लिए प्रोत्साहित करें। मजबूत सामाजिक संबंध उनके व्यक्तित्व विकास में अहम भूमिका निभाते हैं।
नई स्किल सीखना
इंस्ट्रूमेंट, सिलाई-कढ़ाई, कुकिंग या कोई भी नई स्किल सीखने के लिए उन्हें प्रोत्साहित करें। इससे मानसिक विकास और आत्मविश्वास बढ़ता है।
फैमिली गेम टाइम
बोर्ड गेम, पज़ल या कोई भी ऑफलाइन गेम खेलें जिसमें इंटरनेट की जरूरत न हो। इसमें बच्चे के दोस्तों की फैमिली को भी शामिल किया जा सकता है।
प्रकृति से जुड़ना
भले ही बच्चे पहले मना करें, लेकिन माता-पिता को रोज उन्हें पार्क या खुली जगह ले जाने के लिए प्रेरित करना चाहिए। नेचर से जुड़ाव उनकी मानसिक सेहत को बेहतर करता है।
कम्युनिटी वर्क से जोड़ना
छोटे सामाजिक अभियानों या कम्युनिटी वर्क से जोड़ कर बच्चों में सेवा और सकारात्मक सोच विकसित की जा सकती है।
कुकिंग में शामिल करना
बच्चों को किचन एक्टिविटीज़ में भाग लेने दें। साथ ही उन्हें लोकल सब्जी मंडी या फार्म पर ले जाना भी उपयोगी है। इससे वे मेहनत और रोजमर्रा के कामों की अहमियत समझते हैं।
जर्नल या डायरी लिखना
मोबाइल पर टाइप करने की बजाय पेन और पेपर से लिखने की आदत डालें। अपनी रोजमर्रा की गतिविधियों को लिखना उन्हें अभिव्यक्ति का नया तरीका देता है।



