कोलकाता, 05 मई 2026।
भाजपा ने जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी की धरती पर कमल खिलाने का जो सपना देखा था, वह अंतत: साकार हुआ। भगवा पार्टी ने बंगाल विधानसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत के साथ ऐतिहासिक जीत दर्ज कर 15 वर्षों के तृणमूल सरकार का अंत कर दिया।सोमवार को घोषित हुए नतीजों में रात 11.20 बजे तक के आंकड़ों में भाजपा ने 204 सीटों पर जीत दर्ज कर ली थी, जबकि दो सीटों पर आगे चल रही थी। 2021 में भाजपा को मात्र 77 सीटें ही मिली थीं। वहीं गत बार 215 सीटें जीतने वाली तृणमूल कांग्रेस इस समय तक 74 सीटें ही जीत पाई थी और सात सीटों पर आगे थी। भगवा आंधी से मुख्यमंत्री व तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी भी बच नहीं पाईं और बंगाल की सबसे हाट सीट भवानीपुर पर नेता प्रतिपक्ष व भाजपा प्रत्याशी सुवेंदु अधिकारी से 15,105 वोटों से हार गईं। सुवेंदु को 73,917 और ममता को 58,812 वोट मिले। सुवेंदु ने 2011 के विधानसभा चुनाव में भी ममता को नंदीग्राम सीट पर 1,956 वोटों से हराया था।सुवेंदु इस बार भी भवानीपुर के साथ नंदीग्राम सीट पर खड़े हुए थे। उन्होंने वहां तृणमूल प्रत्याशी पवित्र कर को 9,665 वोटों से हराया। सुवेंदु को 1,27301 व पवित्र कर को 1,17,636 वोट मिले। ममता के कई मंत्री व पार्टी के दिग्गज नेता भी तेज थपेड़े नहीं सह पाए।हारने वाले मंत्रियों में शशि पांजा, ब्रात्य बसु, मानस भुइयां, अरूप बिश्वास, मलय घटक, सुजीत बोस, उदयन गुहा, बीरबाहा हांसदा, चंद्रिमा भट्टाचार्य, रथिन घोष, ज्योतिप्रिय मल्लिक, सिद्दीकुल्लाह चौधरी व मलय घटक शामिल हैं। तृणमूल आठ जिलों अलीपुरद्वार, कलिंपोंग, पुरुलिया, बांकुड़ा, झाडग़्राम, जलपाईगुड़ी, पूर्व मेदिनीपुर व दार्जिलिंग में खाता तक नहीं खोल पाई। चुनाव प्रचार के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने दावा किया था कि तृणमूल को कई जिलों में इस बार एक सीट तक नसीब नहीं होगी।वहीं तृणमूल को मालदा, मुर्शिदाबाद, उत्तर दिनाजपुर व दक्षिण 24 परगना जैसे मुस्लिम बहुल जिलों में भी भारी झटका लगा है। वहां मुस्लिमों के एक बड़े वर्ग ने भाजपा के पक्ष में मतदान किया।तृणमूल नंदीग्राम के अलावा सिंगुर सीट भी हार गई, जहां वाममोर्चा के शासन में टाटा मोटर्स के नैनो कार कारखाने के लिए हुए भूमि अधिग्रहण के खिलाफ आंदोलन छेडक़र ममता बंगाल की गद्दी पर पहुंची थी। इसी तरह नदिया व उत्तर 24 परगना जिलों के नतीजों ने भी साफ कर दिया कि मतुआ समुदाय ने इस बार भाजपा का खुलकर समर्थन किया। भाजपा से जीतने वाले प्रमुख नेताओं में पूर्व केंद्रीय मंत्री निशिथ प्रमाणिक, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष, रूपा गांगुली, अग्निमित्रा पाल, सुवेंदु अधिकारी के भाई दिब्येंदु अधिकारी, हिरन चटर्जी शामिल हैं।तृणमूल को अपने सबसे मजबूत गढ़ कोलकाता में भी जोरदार झटका लगा और यहां की टालीगंज, मानिकतल्ला, जोड़ासांको, रासबिहारी, श्यामपुकुर, जादवपुर समेत कई सीटों से हाथ धोना पड़ा। भाजपा को प्रचंड बहुमत दर्शाता है कि उसे महिलाओं का भी पूरा समर्थन मिला है, जिन्होंने लक्ष्मी भंडार की जगह अन्नपूर्णा भंडार पर भरोसा जताया है। भाजपा के टिकट पर चुनाव लडऩे वालीं आरजी कर अस्पताल में दुष्कर्म व हत्या की शिकार हुई डॉक्टर की मां व संदेशखाली में महिलाओं के यौन उत्पीडऩ के खिलाफ मुखर हुईं रेखा पात्र की जीत ने यह भी साबित कर दिया कि महिलाओं की सुरक्षा बंगाल में प्रमुख चुनावी मुद्दों में से एक था। भाजपा की प्रचंड जीत के बीच कांग्रेस व वाममोर्चा भी फिर से अपना खाता खोलने में सफल रही। माकपा ने एक तो कांग्रेस ने दो सीटें जीतीं। डोमकल में माकपा प्रत्याशी मुस्तफिजुर रहमान ने जीत दर्ज की तो फरक्का में कांग्रेस के मोताब शेख व रानीनगर में जुल्फिकार अली जीते।मालूम हो कि 2021 का विधानसभा चुनाव साथ मिलकर लडऩे पर भी कांग्रेस-वाममोर्चा एक सीट नहीं जीत पाई थी, हालांकि दो दशक से अधिक समय बाद विधानसभा चुनाव लड़ रहे बंगाल कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी व तृणमूल छोडक़र कांग्रेस में लौटीं मौसम बेनजीर नूर जीत का स्वाद चख नहीं पाई।दूसरी ओर इंडियन सेक्युलर फ्रंट के नौशाद सिद्दीकी अपनी भांगड़ सीट बचाने में सफल रहे। वहीं तृणमूल से निलंबित होने के बाद अपनी आम जनता उन्नयन पार्टी गठित करने वाले हुमायूं कबीर नउदा व रेजीनगर दोनों सीटों पर जीते, हालांकि उनकी पार्टी का और कोई प्रत्याशी जीत नहीं दर्ज कर पाया। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआएमआईएम को भी एक सीट नसीब नहीं हुई। सुबह आठ बजे से राज्य के समस्त 77 मतगणना केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा के बीच वोटों की गिनती शुरू हुई। पहले पोस्टल बैलेट गिने गए। मतगणना शुरू होने के समय से ही भाजपा ने बढ़त बनाए रखी, जो दिन चढऩे के साथ बढ़ती चली गई। दोपहर 12 बजे के बाद तस्वीर लगभग साफ हो गई कि भाजपा की सरकार बनने वाली है। इसके बाद भाजपा कार्यकर्ताओं व समर्थकों ने केसरिया रंग से होली खेलनी शुरू कर दी।भवानीपुर को लेकर दिनभर सस्पेंस बना रहा। शुरू में कभी ममता तो कभी सुवेंदु आगे-पीछे हो रहे थे। कुछ राउंड बाद ममता लगातार आगे चलने लगीं और एक समय 15 हजार वोटों की बढ़त बना ली थी, हालांकि 9-10 चरण के बाद ममता की बढ़त घटने लगी और एक समय तीन हजार का अंतर रह गया था। इसकी सूचना मिलने पर ममता खुद शेखावत मेमोरियल स्कूल स्थित मतगणना केंद्र पहुंच गईं। कुछ देर बाद सुवेंदु भी वहां पहुंचे।मतगणना केंद्र के गेट पर दोनों का मोबाइल ले लिया गया।
तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी भी वहां पहुंचे थे, हालांकि प्रत्याशी नहीं होने के कारण उन्हें अंदर प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी गई। 13 राउंड बाद भवानीपुर सीट की मतगणना घंटे भर के लिए बंद कर दी गई थी। दोबारा मतगणना शुरू होने के बाद से सुवेंदु ने बढ़त बना ली और अंत में 15,105 वोटों से जीते।भाजपा बंगाल की जनता को यह भरोसा दिलाने में सफल रही कि घुसपैठ व डेमोग्राफी में बदलाव की समस्या का सिर्फ वह ही समाधान कर सकती है। राज्य के लोगों को महसूस कराया कि तृणमूल सरकार की केंद्र के लगातार विरोध व असहयोग की नीति के कारण बंगाल विकास के मामले में लगातार पिछड़ रहा है। बंगाल को केंद्र की योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पा रहा। बंगाल में उद्योग व रोजगार की जरुरत है।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चुनाव प्रचार के दौरान ‘भय बनाम भरोसे’ की जो गारंटी दी, बंगाल के लोगों ने उसे मान्यता प्रदान की।संदेशखाली में महिलाओं के यौन उत्पीडऩ और आरजी कर मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में जूनियर डॉक्टर से दुष्कर्म व हत्या की घटना को लेकर असुरक्षा की भावना से ग्रस्त महिलाओं ने बड़ी संख्या में भाजपा के पक्ष में मतदान किया।भाजपा की प्रचंड जीत मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर उसके प्रति बंगाल की जनता के समर्थन को दर्शाती है। एफआईआर को लेकर उसे मुस्लिमों के वर्ग का भी साथ मिला।भाजपा बंगाल के लोगों को यह समझाने में सफल रही कि वह बाहरी नहीं बल्कि उनकी अपनी है। यही कारण है कि ममता का बंगाली अस्मिता का कार्ड इस बार विफल साबित हो गया।भाजपा की ओर से अपने संकल्प पत्र में महिलाओं, युवाओं, किसानों के लेकर की गईं प्रभावी योजनाएं भी उसके पक्ष में काम कर गईं।
