सागौन-साल समेत 122 पेड़ों की अवैध कटाई मामले में डिप्टी रेंजर निलंबित, पहले बीट गार्ड पर भी हो चुकी है कार्रवाई – vedantsamachar.in

सागौन-साल समेत 122 पेड़ों की अवैध कटाई मामले में डिप्टी रेंजर निलंबित, पहले बीट गार्ड पर भी हो चुकी है कार्रवाई

गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही,03 मई (वेदांत समाचार)। मरवाही वन मंडल के गौरेला वनपरिक्षेत्र अंतर्गत पीपरखूंटी बीट में 122 पेड़ों की अवैध कटाई मामले में प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए डिप्टी रेंजर संतराम रजक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इससे पहले इसी मामले में बीट गार्ड पर भी कार्रवाई करते हुए उसे निलंबित किया जा चुका है। अब जांच रिपोर्ट के आधार पर डिप्टी रेंजर पर भी गाज गिर गई है। गौरतलब है कि गौरेला वन परिक्षेत्र के पीपरखूंटी बीट अंतर्गत कक्ष क्रमांक 2305 पीएफ, 2325 पीएफ, 2301 पीएफ, 2300 पीएफ और 2299 पीएफ में साल, सागौन और विभिन्न प्रजातियों के कुल 122 अवैध कटाई के ठूंठ पाए गए। मौके पर वनोपज न मिलने और बड़े पैमाने पर कटाई की पुष्टि के बाद शासन को करीब 2,60,082 रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया गया। इस मामले को लेकर लल्लूराम डॉट कॉम ने प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी, जिसके बाद रायपुर से राज्य स्तरीय उड़नदस्ता दल और बिलासपुर वृत्त की संयुक्त टीम ने मौके पर जांच की थी।

जांच के दौरान पीपरखूंटी वन परिसर के विभिन्न कक्षों में कुल 122 अवैध पेड़ों के ठूंठ पाए गए थे। मौके पर वनोपज नहीं मिलने से अवैध कटाई की पुष्टि हुई थी। रिपोर्ट के अनुसार वन सुरक्षा में लापरवाही और नियमित भ्रमण न करना इस पूरे मामले का प्रमुख कारण माना गया। इसके बाद वनमंडलाधिकारी ग्रीष्मी चांद ने बीट गार्ड दीपक सिदार को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश जारी किया था, जबकि गौरेला रेंजर प्रबल कुमार दुबे और डिप्टी रेंजर संत राम रजक के निलंबन का प्रस्ताव उच्च स्तर पर भेजा गया था। वहीं अब इस मामले में डिप्टी रेंजर संतराम रजक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। मुख्य वनसंरक्षक, बिलासपुर वृत्त द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि डिप्टी रेंजर द्वारा शासकीय दायित्वों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही और उदासीनता बरती गई, जो छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 का उल्लंघन है।

इसी आधार पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के तहत डिप्टी रेंजर को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय वनमंडलाधिकारी, कटघोरा वनमंडल निर्धारित किया गया है तथा उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा।

वन विभाग ने संकेत दिए हैं कि मामले में आगे भी जांच जारी रहेगी और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई संभव है।