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गारे-पल्मा सेक्टर कोयला खदान का उद्घाटन, महाजेनको ने शुरू किया संचालन…

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छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी खदानों में से एक से जनवरी से होगा कोयला निष्पादन

रायगढ़,19 सितम्बर (वेदांत समाचार) । महाराष्ट्र राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी लिमिटेड (महाजेनको) ने छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के तमनार तहसील में स्थित गारे-पल्मा सेक्टर II (GP-II) कोयला खदान का संचालन विधिवत रूप से शुरू कर दिया है। गुरुवार को खदान के बॉक्स कट कार्य की शुरुआत महाजेनको के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक बी. राधाकृष्णन (IAS) की मौजूदगी में की गई।

इस अवसर पर निदेशक (वित्त) मनीष विश्वनाथ वाघिरकर, निदेशक अभय हरने, कार्यकारी निदेशक नितिन वाघ, पंकज सपाटे समेत कई वरिष्ठ अधिकारी और प्रशासनिक प्रतिनिधि उपस्थित थे।

महाजेनको ने खदान संचालन के लिए सभी आवश्यक पर्यावरणीय, वन एवं प्रशासनिक स्वीकृतियाँ हासिल कर ली हैं। कंपनी ने जनवरी 2026 से यहां से कोयला निष्पादन शुरू करने की योजना बनाई है।

गारे-पल्मा सेक्टर कोयला खदान छत्तीसगढ़ राज्य की सबसे बड़ी खदानों में शामिल है, जिसकी वार्षिक उत्पादन क्षमता 23.6 मिलियन टन है। खदान से निकला कोयला महाराष्ट्र के चंद्रपुर, कोराडी और पारली थर्मल पावर प्लांट्स को आपूर्ति किया जाएगा, जिससे राष्ट्रीय ग्रिड को 3200 मेगावाट से अधिक बिजली उपलब्ध होगी।

कंपनी के अनुसार, इस खदान के शुरू होने से भारत की कोयला आयात पर निर्भरता कम होगी और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण बढ़त मिलेगी। यह कदम ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विज़न को साकार करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

परियोजना से करीब 3400 प्रत्यक्ष और हजारों अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। साथ ही राज्य सरकार को रॉयल्टी, जीएसटी और करों के रूप में बड़ा राजस्व प्राप्त होगा, जिससे क्षेत्रीय विकास और सामाजिक कल्याण को बढ़ावा मिलेगा।

अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक बी. राधाकृष्णन ने कहा कि कंपनी रोजगार सृजन और राजस्व वृद्धि के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास के क्षेत्र में भी लगातार योगदान देगी।

पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए महाजेनको ने अगले 32 वर्षों में 2256.60 हेक्टेयर क्षेत्र पर 56.4 लाख स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

गारे-पल्मा सेक्टर परियोजना को रोजगार, पर्यावरणीय संरक्षण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है।

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