खैरागढ़, 28 अप्रैल(वेदांत समाचार)। शहर के अमलीपारा वार्ड में स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए लाखों रुपये की लागत से तैयार किया गया ‘हमर क्लिनिक’ भवन सोमवार देर रात अचानक आग की चपेट में आ गया। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह क्लिनिक अब तक मरीजों के लिए शुरू भी नहीं हो पाया था और न ही भवन में बिजली का कनेक्शन चालू है। ऐसे में आग लगने की घटना ने पूरे मामले पर संदेह को और गहरा दिया है।
जानकारी के अनुसार, यह क्लिनिक पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में तैयार किया गया था, जिसका उद्देश्य स्थानीय लोगों को घर के पास ही निःशुल्क इलाज, दवाइयां और प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना था। लेकिन उद्घाटन के लंबे समय बाद भी यहां सेवाएं शुरू नहीं हो सकीं। धीरे-धीरे यह भवन स्वास्थ्य केंद्र के बजाय स्टोर रूम के रूप में उपयोग किया जाने लगा, जहां राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) से जुड़े दस्तावेज रखे गए थे, जो अब आग में जलकर नष्ट हो गए हैं।
बिना बिजली के आग से बढ़ा संदेह
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आशीष शर्मा ने बताया कि भवन में बिजली कनेक्शन चालू नहीं था, इसलिए शॉर्ट सर्किट की संभावना नहीं बनती। इस बयान के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है, क्योंकि बिना बिजली के आग लगना सामान्य परिस्थितियों में असामान्य माना जा रहा है।
स्थानीय लोगों के बीच इस घटना को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कुछ लोग इसे महज दुर्घटना मानने को तैयार नहीं हैं और आशंका जता रहे हैं कि यह किसी साजिश या जानबूझकर की गई हरकत भी हो सकती है। घटना का समय भी संदेह को बढ़ा रहा है, क्योंकि आग रात के समय लगी जब आसपास गतिविधियां बेहद कम थीं।
सुरक्षा और लापरवाही पर सवाल
यह क्लिनिक शहर के एक महत्वपूर्ण वार्ड में स्थित है, जहां कई जनप्रतिनिधियों के आवास भी मौजूद हैं। इसके बावजूद न तो भवन में स्वास्थ्य सेवाएं शुरू हो सकीं और न ही सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए। इससे प्रशासनिक लापरवाही को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
घटना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी है। आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आग में जले दस्तावेजों में विभागीय कामकाज से जुड़े कागजात शामिल थे, हालांकि अधिकारियों का कहना है कि इनमें कोई संवेदनशील मरीज संबंधी डेटा नहीं था।
जांच के घेरे में पूरा मामला
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर क्लिनिक समय पर शुरू कर दिया गया होता, तो वहां स्टाफ की मौजूदगी रहती और इस तरह की घटना की संभावना कम हो जाती। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है।
इस घटना ने एक बार फिर सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जहां भवन तो बन जाते हैं, लेकिन सेवाएं आम जनता तक पहुंचने से पहले ही व्यवस्था की खामियों की वजह से दम तोड़ देती हैं।
