Vedant Samachar

छात्रा पर कुत्ते ने किया हमला, दो हिस्सों में बंटा गाल, चेहरे पर लगे 17 टांके…

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उत्तर प्रदेश,24अगस्त : उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में कॉलेज से लौट रही एक छात्रा पर आवारा कुत्तों के ने हमला कर दिया, कुत्ते इसकदर आक्रामक थे कि छात्रा के चेहरे पर ही 17 टांके लगाने पड़े। छात्रा की हालत नाजुक बताई जा रही है। इस घटना ने पूरे इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है, लोग अब घरों से निकलने में भी डर रहे हैं।

श्याम नगर इलाके में कॉलेज से लौट रही छात्रा पर 3 आवारा कुत्तों ने जानलेवा हमला कर दिया। इस हमले में वह गंभीर रूप से घायल हो गई। सबसे भयावह यह हुआ कि छात्रा का गाल फटकर 2 टुकड़ों में बंट गया है और डॉक्टर्स को उसके चेहरे पर 17 टांके लगाने पड़े हैं। पीड़िता की पहचान वैष्णवी साहू के रूप में हुई है, जो एलन हाउस रूमा कॉलेज में BBA अंतिम वर्ष की छात्रा है।

कुत्तों-बंदरों के बीच झगड़ा बना कारण
श्याम नगर इलाके में आवारा कुत्तों और बंदरों के बीच लड़ाई चल रही थी। इसी अफरा-तफरी में वैष्णवी वहां से गुजर रही थी तभी 3 कुत्तों ने उस पर झपट्टा मार दिया। कुत्तों ने उसे सड़क पर घसीटा, चेहरा, नाक और शरीर नोचा डाला।

आवाज सुनकर दौड़े लोग
स्थानीय लोगों ने जब छात्रा की दिल दहला देने वाली चीखें सुनीं, तो लाठी-डंडे लेकर दौड़ पड़े और बड़ी मुश्किल से कुत्तों को भगाया। उस वक्त तक छात्रा का चेहरा लहूलुहान हो चुका था। जिसके बाद परिवार को सूचना दी गई और उसे तत्काल कांशीराम अस्पताल ले जाया गया।

घटना को लेकर डॉक्टर्स की राय
डॉक्टर्स के मुताबिक छात्रा के दाहिने गाल पर गहरी चोटें आई हैं, जो 2 हिस्सों में बंट चुका था। उसे सिर्फ तरल आहार दिया जा रहा है, वो भी स्ट्रॉ के जरिए। परिवार का कहना है कि वैष्णवी शारीरिक और मानसिक रूप से टूट चुकी है।

पड़िता के परिवार की गुहार
पड़िता के परिवार ने से गुहार लगाई है कि सरकार कुछ करे, वरना हर दिन किसी की बेटी को यूं ही मौत का सामना करना पड़ेगा। वैष्णवी के परिजनों ने राज्य सरकार और नगर निगम से अपील की है कि या तो इन कुत्तों को शेल्टर में ले जाएं, या कम से कम सड़कों से हटा दिया जाए। हमारी बेटी की जिंदगी बर्बाद हो गई, हम नहीं चाहते किसी और की बेटी के साथ भी ऐसा हो।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बीच उठे सवाल
यह घटना उस वक्त सामने आई है जब हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि आवारा कुत्तों को नसबंदी के बाद वापस सड़कों पर छोड़ा जा सकता है। यह निर्णय पशु अधिकारों और मानव अधिकारों के बीच संतुलन बनाने के प्रयास के तहत लिया गया था। लेकिन कानपुर की इस भयावह घटना ने एक बार फिर इस फैसले की व्यावहारिकता और जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अब यह सवाल उठने लगा है किया क्या नसबंदी भर से कुत्ते शांत और सुरक्षित हो जाएंगे ? जब शहरों की सड़कों पर कुत्ते खुलेआम हमला कर रहे हैं, तो क्या उन्हें वहीं छोड़ देना सही है ? इंसान की जान की कीमत और सड़क पर चलने का हक क्या कमतर हो गया है ?

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