दुर्ग, 04 अप्रैल (वेदांत समाचार): दुर्ग जिले में अफीम की खेती के मामले में सस्पेंड हुई ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी (RAEO) एकता साहू को राहत मिल गई है। कृषि विभाग ने मानवीय आधार पर एकता साहू का निलंबन वापस लेते हुए उन्हें बहाल कर दिया है। बहाली के साथ ही उन्हें धमधा में नई पोस्टिंग दी गई है। हालांकि, राहत मिलने के बाद भी एकता की मुश्किलें पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं, क्योंकि उनके खिलाफ विभागीय जांच जारी रहेगी।
यह पूरा मामला दुर्ग के समोदा गांव का है, जहां भाजपा नेता विनायक ताम्रकार के खेत में अवैध रूप से अफीम की खेती पकड़ी गई थी। इस मामले में जांच के दौरान लापरवाही पाए जाने पर जिला प्रशासन ने 13 मार्च को एकता साहू को निलंबित कर दिया था। अधिकारियों ने पाया था कि जिस खेत को राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत मक्का फसल का प्रदर्शन प्लॉट बताया गया था, वहां असल में मक्का नहीं बल्कि धान लगा हुआ था। साथ ही पास ही के खेत में अफीम की फसल लहलहा रही थी, जिसकी जानकारी विभाग को नहीं दी गई। निलंबन के बाद एकता साहू को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, जिसके जवाब में उन्होंने दो बार अलग-अलग तर्क दिए।
पहले जवाब में उन्होंने कहा था कि किसान के दस्तावेजों के आधार पर प्लॉट चुना गया था और नक्शा नहीं होने से खसरे की पहचान नहीं हो पाई। उन्होंने यह भी कहा था कि बिजली के तार और बाड़ लगे होने के कारण वह दूसरे प्लॉट की जांच नहीं कर पाई थीं। वहीं, बहाली आदेश के मुताबिक एकता ने अपने नए जवाब में बताया कि दूसरे सरकारी कामों में व्यस्त होने के कारण वह मक्का की फसल की निगरानी नहीं कर पाईं। उन्होंने ऑनलाइन पोर्टल की ट्रेनिंग में कमी और कृषि मैपर एप में सही जानकारी न होने की बात भी कही। साथ ही उन्होंने तर्क दिया कि मैदानी अमले को अफीम जैसी फसलों की पहचान के लिए कोई ट्रेनिंग नहीं दी गई है।
एकता साहू के निलंबन के विरोध में छत्तीसगढ़ कृषि स्नातक शासकीय कृषि अधिकारी संघ ने कड़ा विरोध जताया था। संघ का कहना था कि अफीम की खेती फेंसिंग के अंदर हो रही थी और वहां बाउंसर तैनात थे, ऐसे में किसी भी अधिकारी के लिए बिना इजाजत अंदर जाना मुमकिन नहीं था। संघ ने 23 मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी थी और काम पूरी तरह बंद कर दिया था।
अधिकारियों के बढ़ते दबाव और मानवीय पहलुओं को देखते हुए विभाग ने अब बहाली का फैसला लिया है। बताया जा रहा है कि एकता साहू को नई पदस्थापना मिल गई है, लेकिन उन पर लगे आरोपों की जांच बंद नहीं हुई है। कलेक्टर अभिजीत सिंह इस मामले में अलग से फैसला लेंगे। जांच में यह बात भी सामने आई है कि पोर्टल पर किसान की जगह किसी दूसरे व्यक्ति की फोटो अपलोड की गई थी और मौके पर कोई सूचना बोर्ड भी नहीं लगाया गया था। इस मामले में पटवारी अनिता साहू और फसल सर्वेयर शशिकांत साहू को भी पहले नोटिस जारी किया जा चुका है।
