नई दिल्ली । भारत की अर्थव्यवस्था को गति देने में अब बंदरगाहों की भूमिका पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है। देश के प्रमुख पोर्ट्स पर हर दिन कंटेनरों की आवाजाही, बल्क कार्गो की अनलोडिंग और फ्रेट कॉरिडोर के जरिए माल की सप्लाई एक मजबूत सप्लाई चेन का संकेत दे रही है।
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत के समुद्री व्यापार ने नया रिकॉर्ड बनाया है। केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय के अनुसार, देश के 12 प्रमुख सरकारी पोर्ट्स ने 915.17 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) कार्गो हैंडल किया। यह उपलब्धि बताती है कि भारत तेजी से वैश्विक व्यापार में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है।
भारत के पोर्ट अब पारंपरिक भूमिका से आगे बढ़ चुके हैं। अब ये सिर्फ माल उतारने-चढ़ाने तक सीमित नहीं, बल्कि इंटीग्रेटेड लॉजिस्टिक्स हब बनकर पूरे सप्लाई चेन नेटवर्क को नियंत्रित कर रहे हैं। पोर्ट से लेकर रेल, सड़क, वेयरहाउसिंग और इनलैंड डिलीवरी तक एकीकृत सिस्टम विकसित होने से माल की आवाजाही तेज, सुरक्षित और कम लागत वाली हो रही है।
देश के प्रमुख बंदरगाह जैसे कांडला (दीनदयाल पोर्ट), मुंबई, जवाहरलाल नेहरू पोर्ट, पारादीप, विशाखापट्टनम और चेन्नई आज भी कोयला, कच्चा तेल, खाद और लौह अयस्क जैसे जरूरी संसाधनों की सप्लाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ये पोर्ट देश की ऊर्जा सुरक्षा और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की रीढ़ माने जा रहे हैं।
पोर्ट्स पर टर्नअराउंड टाइम में कमी और कंटेनर मूवमेंट की रफ्तार बढ़ने से निर्यात और आयात दोनों को सीधा लाभ मिल रहा है। समय पर डिलीवरी से भारतीय उत्पादों की वैश्विक बाजार में विश्वसनीयता भी बढ़ी है।
गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर हाल ही में एक जहाज से करीब 6000 कारों का निर्यात किया गया, जो “मेक इन इंडिया” अभियान की सफलता और ऑटो सेक्टर की मजबूती का बड़ा संकेत है।
भारत में पोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में निजी कंपनियों की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है। अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन देश का सबसे बड़ा निजी पोर्ट ऑपरेटर बनकर एंड-टू-एंड लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूत कर रहा है। वहीं जेएसडब्ल्यू इंफ्रास्ट्रक्चर और डीपी वर्ल्ड जैसे प्रमुख खिलाड़ी भी कंटेनर टर्मिनल और कनेक्टिविटी सुधारकर व्यापार को आसान बना रहे हैं।
भारत का समुद्री क्षेत्र अब दोहरी ताकत के साथ आगे बढ़ रहा है—सरकारी पोर्ट्स की क्षमता और निजी सेक्टर की दक्षता। आज पोर्ट्स सिर्फ कार्गो हैंडलिंग सेंटर नहीं, बल्कि देश के व्यापार और सप्लाई चेन के रणनीतिक केंद्र बन चुके हैं।
