छत्तीसगढ़ बॉयलर हादसे पर अनिल अग्रवाल के समर्थन में उद्योग जगत, ‘बेबुनियाद एफआईआर’ पर उठे सवाल – vedantsamachar.in

छत्तीसगढ़ बॉयलर हादसे पर अनिल अग्रवाल के समर्थन में उद्योग जगत, ‘बेबुनियाद एफआईआर’ पर उठे सवाल

रायपुर, 20 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ में हुए दुखद बॉयलर हादसे के बाद वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के खिलाफ दर्ज एफआईआर को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई है। उद्योग जगत और सार्वजनिक जीवन से जुड़े कई प्रमुख व्यक्तित्व उनके समर्थन में सामने आए हैं और एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।

इस मामले में सांसद और उद्योगपति नवीन जिंदल ने हादसे को बेहद दुखद बताते हुए प्रभावित परिवारों के लिए उचित मुआवजा, आजीविका सहायता और निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि बिना पूरी जांच के ही अनिल अग्रवाल का नाम एफआईआर में शामिल करना गंभीर प्रश्न खड़े करता है। जिंदल ने यह भी कहा कि जब सार्वजनिक उपक्रमों या रेलवे में हादसे होते हैं, तब शीर्ष पदों पर बैठे लोगों के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई नहीं होती, ऐसे में निजी क्षेत्र के साथ अलग व्यवहार उचित नहीं है।

पूर्व उपराज्यपाल और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी किरण बेदी ने भी जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालने से बचने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जांच का उद्देश्य सीख लेकर व्यवस्था को मजबूत करना होना चाहिए, न कि बिना तथ्यों के आधार पर निर्णय लेना।

उद्योग और वित्तीय क्षेत्र से जुड़े अन्य विशेषज्ञों ने भी इस एफआईआर को लेकर चिंता जताई है। पद्मश्री से सम्मानित मोहनदास पाई ने इसे अनुचित बताते हुए कहा कि बिना प्रत्यक्ष जिम्मेदारी के किसी पर आरोप लगाना उद्योग में भय का माहौल बना सकता है। वहीं कॉर्पोरेट सलाहकार अक्षत खेतान ने इसे निवेशकों के विश्वास पर असर डालने वाला कदम बताया।

बाजार विशेषज्ञ विजय केडिया ने जवाबदेही में समानता की बात करते हुए कहा कि यदि फैक्ट्री हादसे में प्रमोटर पर एफआईआर होती है, तो अन्य क्षेत्रों में भी यही मानक लागू होना चाहिए। तकनीकी विशेषज्ञ भानु प्रकाश ने कहा कि जिम्मेदारी तय करने से पहले तथ्यों का सामने आना जरूरी है।

वरिष्ठ पत्रकार पंकज पचौरी ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि आमतौर पर इस तरह की सार्वजनिक घटनाओं में शीर्ष अधिकारियों के नाम सीधे शामिल नहीं किए जाते और इस पर गंभीरता से विचार होना चाहिए।

इस पूरे घटनाक्रम ने देश में निवेश माहौल, शासन प्रणाली और न्याय प्रक्रिया को लेकर व्यापक चर्चा छेड़ दी है। विभिन्न वर्गों से एक ही मांग सामने आ रही है कि कानून के तहत निष्पक्ष जांच हो, तथ्यों के आधार पर जिम्मेदारी तय की जाए और उसके बाद ही कार्रवाई की जाए।