जांजगीर-चांपा, 08 अगस्त (वेदांत समाचार)। शहर में डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई है। मिशन क्लीन सिटी के तहत शहर की सफाई व्यवस्था संभालने वाली स्वच्छता दीदियां 1 अगस्त से अपनी तीन सूत्रीय मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं। करीब एक सप्ताह से कचरा नहीं उठने के कारण शहर के कई वार्डों में सड़कों, गलियों और मोहल्लों में कचरे के ढेर दिखाई देने लगे हैं। सबसे बड़ी चिंता यह है कि नगर पालिका की ओर से अब तक कचरा उठाने के लिए कोई प्रभावी वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है।
बरसात के मौसम में सफाई व्यवस्था प्रभावित होने से लोगों की परेशानी और बढ़ गई है। कई जगहों पर घरों से निकलने वाला कचरा लोग मजबूरी में घरों के आसपास या सड़क किनारे जमा कर रहे हैं। बारिश के कारण कचरा सड़ने से दुर्गंध फैलने लगी है और नालियों के जाम होने की समस्या भी सामने आ रही है। इससे मच्छरों के पनपने के साथ डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ने की आशंका है।
स्वच्छता दीदियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर अधिकारियों के समक्ष बात रख रही हैं, लेकिन अपेक्षित समाधान नहीं हुआ। इसी के चलते शहर की स्वच्छता व्यवस्था संभालने वाली महिलाएं राजधानी रायपुर में आयोजित हड़ताल में शामिल होने पहुंची हैं। स्वच्छता दीदियों की प्रमुख मांगों में कलेक्टर दर पर वेतन, समय पर भुगतान और सफाई कार्य के दौरान जरूरी सुरक्षा सामग्री उपलब्ध कराना शामिल है।
हड़ताल कर रही स्वच्छता दीदियों के मुताबिक उन्हें कलेक्टर दर पर वेतन नहीं दिया जा रहा है। इसके अलावा कई बार तीन से चार महीने तक वेतन नहीं मिलने की स्थिति बन जाती है। लंबे समय तक भुगतान नहीं होने के कारण उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाता है। उनका कहना है कि नियमित रूप से शहर की सफाई और घर-घर से कचरा संग्रहण करने के बावजूद समय पर मेहनताना नहीं मिलना गंभीर समस्या है।
स्वच्छता दीदियों ने सफाई कार्य के दौरान सुरक्षा संसाधनों की कमी का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि रोजाना गंदगी और कचरे के बीच काम करने के बावजूद उन्हें पर्याप्त दस्ताने, नई साड़ी और अन्य जरूरी सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए जाते। लंबे समय से सुरक्षा सामग्री नहीं मिलने के कारण सफाई कार्य के दौरान उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
स्वच्छता दीदियों ने अपनी मांगों को लेकर 10 अगस्त तक हड़ताल जारी रखने की बात कही है। हालांकि, लगातार बिगड़ती सफाई व्यवस्था को देखते हुए शासन की ओर से कर्मचारियों को काम पर लौटने का नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में तत्काल काम पर लौटने के निर्देश दिए गए हैं और ऐसा नहीं करने पर एकतरफा कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
अब बड़ा सवाल यह है कि नोटिस के बाद स्वच्छता दीदियां काम पर लौटती हैं या अपनी मांगों को लेकर हड़ताल जारी रखती हैं। यदि हड़ताल आगे भी जारी रहती है तो आने वाले दिनों में जांजगीर-चांपा शहर की सफाई व्यवस्था और अधिक प्रभावित हो सकती है।
इधर, शहरवासियों की चिंता भी लगातार बढ़ रही है। बरसात के बीच जगह-जगह कचरा जमा होने से दुर्गंध, नालियों के जाम होने और मच्छरों के बढ़ने की समस्या सामने आ रही है। लोगों का कहना है कि सफाई व्यवस्था बाधित होने की स्थिति में नगर पालिका को तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि घरों और सार्वजनिक स्थानों से कचरा उठाया जा सके।
फिलहाल शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह स्वच्छता दीदियों की हड़ताल पर निर्भर नजर आ रही है। प्रशासन और नगर पालिका की ओर से समस्या के स्थायी समाधान तथा शहर में नियमित कचरा संग्रहण व्यवस्था बहाल करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

