डिजिटल पुलिसिंग पर आईजी गर्ग सख्त, ई-समन, वीसी गवाही और ई-साक्ष्य के शत-प्रतिशत उपयोग के निर्देश - vedantsamachar.in

डिजिटल पुलिसिंग पर आईजी गर्ग सख्त, ई-समन, वीसी गवाही और ई-साक्ष्य के शत-प्रतिशत उपयोग के निर्देश


बिलासपुर, 4 अगस्त। बिलासपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) राम गोपाल गर्ग ने मंगलवार को रेंज स्तरीय समीक्षा बैठक में पुलिसिंग को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और तकनीक आधारित बनाने पर जोर देते हुए सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को ई-समन, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (न्याय श्रुति), ई-साक्ष्य और डिजिटल पुलिसिंग का शत-प्रतिशत उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने लंबित प्रकरणों के त्वरित निराकरण और न्यायालयीन प्रक्रियाओं में तेजी लाने के लिए आधुनिक तकनीक के प्रभावी उपयोग पर विशेष बल दिया।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित बैठक में बिलासपुर, रायगढ़, कोरबा, जांजगीर-चांपा, मुंगेली, सक्ती, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही और सारंगढ़-बिलाईगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एवं पुलिस अधीक्षक शामिल हुए।

बैठक में आईजी गर्ग ने न्यायालयीन समन और वारंट की तामिली की रियल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए गूगल शीट आधारित प्रणाली लागू करने के निर्देश दिए। इसके तहत थानों में पदस्थ कोर्ट आरक्षक समन-वारंट की तामिली, गवाहों की उपस्थिति और अदम तामिली के कारण ऑनलाइन दर्ज करेंगे, जिससे अनावश्यक पत्राचार समाप्त होगा और लंबित मामलों के निस्तारण में तेजी आएगी।

उन्होंने बताया कि शासन की अधिसूचना के अनुसार अब ई-समन की तामिली व्हाट्सएप के माध्यम से भी की जा सकेगी। प्राप्तकर्ता द्वारा भेजा गया ‘ओके’ संदेश का स्क्रीनशॉट वैध माना जाएगा। साथ ही नए जिलों में डेटा मैपिंग, नेटवर्क और जीपीएस अपलोड संबंधी तकनीकी समस्याओं का शीघ्र समाधान करने के निर्देश भी दिए गए।

आईजी ने न्यायालयीन गवाही को आसान बनाने के लिए सभी थानों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा से जोड़ने और आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि न्यायालयों से समन में ही यह उल्लेख कराने का प्रयास किया जाएगा कि गवाही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से होगी या न्यायालय में व्यक्तिगत उपस्थिति आवश्यक होगी।

उन्होंने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा-105 के तहत जब्ती, तलाशी और गवाहों के बयान की वीडियो रिकॉर्डिंग (ई-साक्ष्य) को अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्देश दिए। प्रत्येक जिले में एक थाने को ‘आइडियल सीसीटीएनएस थाना’ के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां विवेचक स्वयं सभी ऑनलाइन प्रविष्टियां करेंगे।

बैठक में सुरक्षा एवं प्रशासनिक विषयों पर भी चर्चा हुई। आईजी ने समाधान एप के माध्यम से अवैध प्रवासियों, किरायेदारों और फेरीवालों का नियमित सत्यापन सुनिश्चित करने तथा इसकी साप्ताहिक रिपोर्ट रेंज कार्यालय को भेजने के निर्देश दिए। वहीं बाइक चोरी जैसे संपत्ति संबंधी अपराधों में एफआईआर दर्ज करते समय इंजन और चेसिस नंबर अनिवार्य रूप से दर्ज करने को कहा, ताकि संबंधित डेटाबेस को अद्यतन रखा जा सके।

बैठक के अंत में आईजी राम गोपाल गर्ग ने कहा कि पुलिसिंग में पारदर्शिता, गुणवत्ता, समयबद्धता और तकनीक का अधिकतम उपयोग ही बेहतर कानून-व्यवस्था और न्याय प्रणाली की आधारशिला है। उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देशों का अक्षरशः पालन करते हुए टीम भावना के साथ कार्य करने और थानों में लंबित मामलों को प्राथमिकता से कम करने के निर्देश दिए।