BREAKING : पारिवारिक तनाव और नशे की लत से टूटा युवक, घर में लगा ली फांसी... - vedantsamachar.in

BREAKING : पारिवारिक तनाव और नशे की लत से टूटा युवक, घर में लगा ली फांसी…

धमतरी, 04 अगस्त (वेदांत समाचार)। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में आत्महत्या के मामलों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। जिले में एक बार फिर पारिवारिक तनाव और नशे की लत के बीच एक व्यक्ति ने अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। यह घटना शहर के कोतवाली थाना क्षेत्र स्थित मकेश्वर वार्ड की है, जहां रहने वाले मिलन साहू ने अपने ही घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना के बाद इलाके में शोक का माहौल है, जबकि पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मिलन साहू लंबे समय से शराब पीने का आदी था। अत्यधिक शराब सेवन की उसकी आदत के कारण परिवार में अक्सर विवाद होता रहता था। बताया जा रहा है कि इसी वजह से उसकी पत्नी करीब तीन वर्ष पहले उसे छोड़कर अपने मायके चली गई थी। पत्नी के अलग हो जाने के बाद मिलन अकेले रहने लगा और धीरे-धीरे मानसिक तनाव में डूबता चला गया। परिजनों के अनुसार, पत्नी के जाने के बाद उसकी शराब पीने की आदत और बढ़ गई थी तथा वह अक्सर उदास और परेशान रहता था।

बताया जाता है कि पारिवारिक बिखराव, अकेलापन और लगातार बढ़ते मानसिक दबाव के कारण वह काफी समय से तनाव में था। इसी मानसिक स्थिति के बीच उसने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और इसकी सूचना कोतवाली पुलिस को दी। सूचना मिलने के बाद कोतवाली थाना पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा कार्रवाई पूरी की और पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और आत्महत्या के पीछे के सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।

धमतरी जिले में लगातार बढ़ रही आत्महत्या की घटनाएं प्रशासन और समाज दोनों के लिए चिंता का विषय बनती जा रही हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2026 के शुरुआती छह महीनों में जिले में 174 लोगों ने आत्महत्या की थी। इन मामलों में पारिवारिक कलह, आर्थिक तंगी, प्रेम संबंधों में तनाव, बेरोजगारी, मानसिक अवसाद और नशे की लत जैसे कारण प्रमुख रूप से सामने आए हैं। लगातार बढ़ते ऐसे मामलों ने मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक सहयोग की आवश्यकता को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि शराब और अन्य नशीले पदार्थों का अत्यधिक सेवन व्यक्ति की सोचने-समझने की क्षमता को प्रभावित करता है। नशे की स्थिति में व्यक्ति अक्सर भावनात्मक रूप से कमजोर हो जाता है और तनाव या निराशा के क्षणों में गलत निर्णय लेने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए नशे की लत से जूझ रहे लोगों को समय पर चिकित्सकीय और मनोवैज्ञानिक सहायता उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि परिवार और समाज की भूमिका भी ऐसे मामलों में महत्वपूर्ण होती है। यदि किसी व्यक्ति के व्यवहार में लगातार उदासी, अकेलापन, निराशा या तनाव के संकेत दिखाई दें तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय उससे बातचीत करनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लेने के लिए प्रेरित करना चाहिए। समय पर मिला भावनात्मक सहयोग कई बार किसी व्यक्ति की जिंदगी बचा सकता है। पुलिस ने भी लोगों से अपील की है कि यदि किसी परिवार में मानसिक तनाव या घरेलू विवाद जैसी स्थिति हो तो उसे गंभीरता से लें और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास करें। प्रशासन का मानना है कि सामाजिक जागरूकता, परिवार का सहयोग और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाकर ऐसी दुखद घटनाओं में कमी लाई जा सकती है।