रायपुर, 19 जुलाई 2026 (वेदांत समाचार)। छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के खिलाफ राज्य सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत नारायणपुर जिले में बड़ा कार्रवाई करते हुए पुलिस ने एक गंभीर मामले में तत्कालीन थाना प्रभारी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। मामला सड़क दुर्घटना में दिवंगत डीएसएफ (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड/डीएसएफ) आरक्षक की पत्नी को मिले एक करोड़ रुपये के दुर्घटना बीमा दावे से जुड़ा है, जिसमें बीमा राशि दिलाने के नाम पर 19 लाख रुपये की कथित अवैध वसूली और शेष राशि में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी मांगने का आरोप लगाया गया है। मामले में एक अधिवक्ता भी आरोपी है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार तलाश कर रही है।
पुलिस के अनुसार, डीएसएफ आरक्षक स्वर्गीय धनेश्वर नुरेटी की सड़क दुर्घटना में मृत्यु के बाद उनकी पत्नी के बैंक खाते में भारतीय स्टेट बैंक के वेतन पैकेज के तहत एक करोड़ रुपये की दुर्घटना बीमा राशि जमा हुई थी। आरोप है कि उस समय नारायणपुर में पदस्थ तत्कालीन थाना प्रभारी सुरेश चंद्र यादव और अधिवक्ता कृष्ण कुमार वर्मा ने बीमा क्लेम दिलाने के नाम पर मृतक के परिजनों से 19 लाख रुपये ले लिए।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि दोनों आरोपियों ने बीमा राशि मिलने के बाद शेष रकम में भी 50 प्रतिशत हिस्सेदारी की मांग की। जब परिजनों ने इसका विरोध किया तो उन्हें न्यायालय में मुकदमा दर्ज कराने, कानूनी कार्रवाई में फंसाने और लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित करने की धमकी दी गई। लगातार हो रही कथित वसूली और दबाव से परेशान होकर मृतक आरक्षक के परिवार ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय, नारायणपुर में लिखित शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत प्राप्त होते ही पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में शिकायत में लगाए गए आरोपों के समर्थन में पर्याप्त तथ्य सामने आने पर थाना कोतवाली नारायणपुर में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318, 308 एवं अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया गया।
जांच के बाद आरोपी तत्कालीन थाना प्रभारी सुरेश चंद्र यादव को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। वहीं सह-आरोपी अधिवक्ता कृष्ण कुमार वर्मा की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे भी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
इस कार्रवाई को राज्य सरकार की भ्रष्टाचार और कदाचार के खिलाफ अपनाई गई जीरो टॉलरेंस नीति के तहत एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी अपने पद का दुरुपयोग कर अवैध वसूली, भ्रष्टाचार अथवा किसी भी प्रकार की अनियमितता में लिप्त पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध बिना किसी भेदभाव के कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस का कहना है कि कानून का पालन कराने वाले तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा भविष्य में भी इस प्रकार के मामलों में दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।

