धमतरी के 'पैक्स आधारित ड्रोन कृषि मॉडल' की दिल्ली-कोलकाता तक गूंज - vedantsamachar.in

धमतरी के ‘पैक्स आधारित ड्रोन कृषि मॉडल’ की दिल्ली-कोलकाता तक गूंज

सीएससी के 17वें स्थापना दिवस पर मिला राष्ट्रीय सम्मान

​रायपुर , 19 जुलाई (वेदांत समाचार) । छत्तीसगढ़ के कृषि क्षेत्र में हो रहे आधुनिक नवाचारों को एक बार फिर राष्ट्रीय पटल पर बड़ी पहचान मिली है। धमतरी जिले में कलेक्टर के मार्गदर्शन में विकसित किए गए देश के पहले प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति (PACS) आधारित ड्रोन कृषि सेवा मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है।

​कोलकाता में आयोजित कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) ई-गवर्नेंस सर्विसेज इंडिया लिमिटेड के 17वें स्थापना दिवस समारोह में इस मॉडल को ग्रामीण भारत में कृषि आधुनिकीकरण का एक अनुकरणीय उदाहरण माना गया।

​देश के सामने गूंजी छत्तीसगढ़ के नवाचार की सफलता
​समारोह के दौरान “बेहतर कृषि सेवाओं की उपलब्धता के लिए पैक्स (PACS) का सशक्तिकरण” विषय पर एक उच्च स्तरीय पैनल चर्चा आयोजित की गई। इसमें धमतरी जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने बतौर मुख्य वक्ता जिले के इस सफल मॉडल और भविष्य के रोडमैप को देश के कृषि व सहकारिता विशेषज्ञों के सामने विस्तार से प्रस्तुत किया।

​इस चर्चा में पश्चिम बंगाल सरकार के सहकारिता विभाग के विशेष रजिस्ट्रार पार्थ बसु, वॉव गो ग्रीन-ड्रोन के एमडी डॉ. शंकर गोयनका और इफको एमसी एग्रोकेमिकल्स के सीईओ मनोज वार्ष्णेय सहित देश के कई दिग्गज नीति निर्धारकों ने हिस्सा लिया और धमतरी के इस मॉडल को सराहा।

​धमतरी बना देश का पहला ऐसा जिला, इन 10 समितियों से शुरुआत
​उल्लेखनीय है कि धमतरी देश का पहला ऐसा जिला है, जिसने सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को सीधे ड्रोन सेवाएं उपलब्ध कराई हैं। पिछले माह लोहरसी समिति में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में इसका सफल प्रदर्शन किया गया था। वर्तमान में जिले की 10 प्रमुख पैक्स समितियों में प्रशिक्षित स्थानीय युवाओं (ड्रोन पायलटों) द्वारा तरल उर्वरकों और कीटनाशकों का वैज्ञानिक छिड़काव किया जा रहा है। ​ड्रोन सेवा से जुड़ी समितियां​ बोड़रा, लोहरसी, दोनर, अछोटा, खरेंगा,​भोथीडीह, कुंदेल, गड़ाडीह, जुगदेही और करेली है।

​किसानों को क्या होगा सीधा फायदा?
​पैनल चर्चा में विशेषज्ञों ने माना कि ड्रोन तकनीक केवल एक मशीन नहीं, बल्कि टिकाऊ और लाभकारी खेती का भविष्य है। इससे किसानों को उर्वरकों और कीटनाशकों का सटीक और समान छिड़काव होने से बर्बादी रुकती है। घंटों का काम अब मिनटों में सुरक्षित तरीके से पूरा हो जाता है। पानी, खाद और श्रम की भारी बचत होती है, जिससे किसानों की आय बढ़ेगी।

​अगला कदम: ‘वन-स्टॉप शॉप’ बनेंगे पैक्स
​प्रशासन इस मॉडल को और व्यापक बनाने की तैयारी में है। आगामी चरण में इन समितियों के माध्यम से कृषि यंत्रीकरण, फसल सर्वेक्षण, किसान पंजीयन, बैंकिंग व वित्तीय सुविधाएं तथा कृषि परामर्श जैसी तमाम सेवाओं को एकीकृत किया जाएगा, ताकि किसानों को किसी भी काम के लिए गांव से बाहर न जाना पड़े। ​राज्य सरकार का मानना है कि तकनीक से लैस यह सहकारिता आंदोलन ही ‘विकसित छत्तीसगढ़’ की असली आधारशिला बनेगा।