KORBA : सिर्फ प्रेम रूपी बंधन में ही बंधते हैं भवसागर से पार लगाने वाले भगवान – पं.देवकृष्ण शर्मा जी – vedantsamachar.in

KORBA : सिर्फ प्रेम रूपी बंधन में ही बंधते हैं भवसागर से पार लगाने वाले भगवान – पं.देवकृष्ण शर्मा जी

0 पंडित रविशंकर शुक्ल नगर में बयचंद साहू ,श्रीमती अनिता साहू द्वारा आयोजित संगीतमय श्रीमद भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ महोत्सव में बह रही भक्ति की बयार।

कोरबा, 03 अप्रैल (वेदांत समाचार)। भवसागर से पार लगाने वाले भगवान को किसी भी रस्सी से नहीं बांधा जा सकता, भगवान प्रेम रूपी बंधन में बंधते हैं। मां यशोदा द्वारा रस्सी से बांधने में विफल रहने पर नटखट कान्हा जी अपनी मां यशोदा की पीड़ा ,परेशानी को कम करने प्रेम रूपी रस्सी से बंध गए । इसलिए हमें आजीवन भगवान को प्रेम रूपी बंधन में बांधने प्रयत्नशील रहना चाहिए,इसी में हमारे जीवन का कल्याण निहित है।

उक्त बातें टेमर सक्ती से पधारे पंडित देवकृष्ण शर्मा ने रवि शंकर शुक्ल नगर कोरबा स्थित कपिलेश्वरनाथ मंदिर प्रांगण में श्री बयचंद साहू ,श्रीमती अनिता साहू द्वारा आयोजित संगीतमय श्रीमद भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ महोत्सव के पांचवे दिवस गुरुवार को भगवान कृष्ण की बाल लीला कथा प्रसंग के दौरान कही। कथाव्यास पं.देवकृष्ण शर्मा ने उपस्थित श्रोताओं को बताया कि जो स्वयं बंधन में रहकर दूसरों को बंधन से मुक्त कर दे वही भगवान हैं। जिस तरह लीलाधर ने अपनी बाललीला के दौरान मां यशोदा जी द्वारा ओखली से बांधा जाना स्वीकार करने के उपरांत उसके सहारे श्रापगत पेंड के रूप में जड़जीवन जी रहे कुबेर के पुत्र मणिग्रीव और नलकुबर को पेंड को जड़ समेत उखाड़कर देवर्षि नारद के श्राप से मुक्त कराया। कथव्यास श्री शर्मा जी ने भगवान कृष्ण के माखनचोरी की बाल लीला कथा का प्रभावपूर्ण वर्णन कर उपस्थित श्रोताओं को आनंदित कर दिया गया। संगीतमय कथा प्रसंग के दौरान कथास्थल पर ही माखनचोरी की मनोहारी झांकी निकाली गई।

जिसमें लीलाधर माखनचोर की टोली ने माखनचुराकर श्रीताओं को आनंद उल्लास से सराबोर कर दिया। मां सरस्वती की विशेष कृपा प्राप्त स्वर के धनी कथाव्यास पं.देवकृष्ण शर्मा जी के कथाप्रसंग के बीच मनोहारी संगीतमय भजन की प्रस्तुति से श्रोतागण कथास्थल पर ही झूम रहे। कथा प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से हरिकृपा तक आयोजित की जा रही। उक्त पुनीत आयोजन से पंडित रविशंकर शुक्ल नगर में भक्ति की बयार बह रही है।