भारत की वैश्विक पहचान मजबूत कर रहा EDII का 'जर्नल ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप', H-Index 37 और Impact Factor 2.5 तक पहुंचा - vedantsamachar.in

भारत की वैश्विक पहचान मजबूत कर रहा EDII का ‘जर्नल ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप’, H-Index 37 और Impact Factor 2.5 तक पहुंचा

रायपुर, 10 जुलाई 2026। एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (EDII), अहमदाबाद की ओर से सेज पब्लिकेशन्स द्वारा प्रकाशित ‘जर्नल ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप (JOE)’ उद्यमिता अनुसंधान के क्षेत्र में भारत की वैश्विक पहचान को लगातार नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रहा है। यह पीयर-रिव्यूड त्रैमासिक शोध पत्रिका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत साख कायम रखते हुए दुनिया के प्रमुख इंडेक्सिंग और सिटेशन प्लेटफॉर्म्स में सूचीबद्ध है।

ईडीआईआई के महानिदेशक डॉ. सुनील शुक्ला के संपादन में प्रकाशित इस प्रतिष्ठित शोध पत्रिका को स्कोपस, वेब ऑफ साइंस के इमर्जिंग सोर्सेज सिटेशन इंडेक्स (ESCI), ABDC Journal Quality List, EconLit, ProQuest, EBSCO और ANVUR जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म्स में स्थान मिला है। जर्नल का एच-इंडेक्स (H-Index) 37 और जर्नल इम्पैक्ट फैक्टर 2.5 तक पहुंच चुका है, जो इसकी बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता और शोध गुणवत्ता का प्रमाण माना जा रहा है।

वर्ष 1992 में स्थापित ‘जर्नल ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप’ पिछले तीन दशकों से उद्यमिता से जुड़े शोध, नवाचार और नीति निर्माण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह शोध पत्रिका दुनिया भर के शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, नीति-निर्माताओं, शिक्षकों और उद्योग विशेषज्ञों को एक साझा मंच उपलब्ध कराती है, जहां उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं से जुड़े उद्यमिता विषयों पर गंभीर शोध और विचार-विमर्श को बढ़ावा दिया जाता है।

इस जर्नल में मौलिक शोध लेख, वैचारिक शोध-पत्र, केस स्टडी, विश्लेषणात्मक टिप्पणियां और दृष्टिकोण आधारित लेख प्रकाशित किए जाते हैं। इसके प्रमुख विषयों में उद्यमिता सिद्धांत, उद्यमी व्यवहार, स्टार्टअप रणनीति, पारिवारिक व्यवसाय, सामाजिक उद्यमिता, अंतरराष्ट्रीय उद्यमिता, नेतृत्व, नवाचार और उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र शामिल हैं। इसके अलावा अर्थशास्त्र, मनोविज्ञान, समाजशास्त्र, मानवशास्त्र, इतिहास और प्रबंधन जैसे विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं से भी शोध योगदान आमंत्रित किए जाते हैं।

जर्नल ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप के संपादक एवं ईडीआईआई के महानिदेशक डॉ. सुनील शुक्ला ने कहा कि पिछले तीन दशकों से यह शोध पत्रिका उद्यमिता संबंधी ज्ञान को समृद्ध करने के लिए एक विश्वसनीय मंच के रूप में कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि बीते एक वर्ष में जर्नल का एच-इंडेक्स 34 से बढ़कर 37 और इम्पैक्ट फैक्टर 1.9 से बढ़कर 2.5 हो गया है। उनके अनुसार यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि भारत का शोध वैश्विक स्तर पर लगातार अधिक प्रभावशाली बन रहा है और उद्यमिता अनुसंधान आर्थिक विकास एवं सतत विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

उन्होंने कहा कि आज वैश्विक अर्थव्यवस्था और नवाचार आधारित विकास में उद्यमिता की भूमिका तेजी से बढ़ रही है। ऐसे समय में ‘जर्नल ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप’ शोध आधारित निष्कर्षों और व्यावहारिक जानकारियों के माध्यम से नीति-निर्माताओं, शिक्षाविदों और उद्योग जगत को महत्वपूर्ण दिशा प्रदान कर रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस शोध पत्रिका की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा न केवल भारतीय शोधकर्ताओं के लिए वैश्विक मंच तैयार कर रही है, बल्कि भारत को उद्यमिता अनुसंधान के क्षेत्र में एक मजबूत और विश्वसनीय केंद्र के रूप में स्थापित करने में भी अहम भूमिका निभा रही है।