कोरबा:रामपुर में आकाशीय बिजली का कहर: इमली के पेड़ पर गिरी बिजली, छह साइबेरियन पक्षियों की मौत; तड़ित चालकों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल - vedantsamachar.in

कोरबा:रामपुर में आकाशीय बिजली का कहर: इमली के पेड़ पर गिरी बिजली, छह साइबेरियन पक्षियों की मौत; तड़ित चालकों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

ग्रामीणों ने तड़ित चालकों की तकनीकी जांच और संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त लाइटनिंग अरेस्टर लगाने की मांग की

कोरबा, 2 जुलाई। करतला थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत रामपुर में बुधवार दोपहर आकाशीय बिजली गिरने से छह साइबेरियन पक्षियों की मौत हो गई। घटना के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल है। वहीं, ग्रामीणों ने गांव में स्थापित तड़ित चालकों (लाइटनिंग अरेस्टर) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उनकी तत्काल तकनीकी जांच कराने की मांग की है।

जानकारी के अनुसार, बुधवार दोपहर करीब 3:45 बजे अचानक मौसम खराब हो गया। तेज गरज-चमक के साथ बारिश शुरू हुई और इसी दौरान दशहरा चौक के समीप स्थित एक विशाल इमली के पेड़ पर आकाशीय बिजली गिर गई। उस समय पेड़ पर बड़ी संख्या में पक्षी बैठे हुए थे। बिजली की चपेट में आने से छह साइबेरियन पक्षियों की मौके पर ही मौत हो गई।

घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। मृत पक्षियों को देखकर लोगों में चिंता और दुख का माहौल बन गया। ग्रामीणों का कहना है कि यदि घटना के समय पेड़ के नीचे लोग मौजूद होते, तो बड़ा हादसा हो सकता था।

घटना के बाद गांव में पहले से स्थापित तड़ित चालकों की प्रभावशीलता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि आकाशीय बिजली से जन-धन, पशुधन और पक्षियों की सुरक्षा के उद्देश्य से गांव में तड़ित चालक लगाए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद बिजली सीधे पेड़ पर गिर गई, जिससे छह पक्षियों की जान चली गई। उनका कहना है कि यह जांच का विषय है कि लगाए गए उपकरण पूरी तरह कार्यशील हैं या नहीं।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, संबंधित विभाग और पंचायत प्रतिनिधियों से गांव में स्थापित सभी तड़ित चालकों का तत्काल तकनीकी परीक्षण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि कोई उपकरण खराब या निष्क्रिय पाया जाता है, तो उसे तुरंत बदलकर आधुनिक और अधिक क्षमता वाले तड़ित चालक लगाए जाएं।

ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि दशहरा चौक, स्कूल पारा तथा अन्य संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त लाइटनिंग अरेस्टर स्थापित किए जाएं, ताकि मानसून के दौरान आकाशीय बिजली से लोगों, मवेशियों और पक्षियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

स्थानीय लोगों का कहना है कि मानसून के दौरान इस क्षेत्र में आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं समय-समय पर होती रहती हैं। ऐसे में विशेषज्ञों की टीम से पूरे क्षेत्र का सर्वे कराकर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाया जाना आवश्यक है।

यह घटना प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के लिए स्थापित सुरक्षा उपकरणों की नियमित निगरानी, समय-समय पर तकनीकी परीक्षण और प्रभावी रखरखाव की आवश्यकता को एक बार फिर रेखांकित करती है। साथ ही, यह भी ध्यान देने योग्य है कि केवल तड़ित चालक लगे होने का अर्थ यह नहीं कि उसके आसपास किसी भी स्थान पर बिजली कभी नहीं गिरेगी। ऐसे उपकरणों की स्थिति और उनकी सुरक्षा सीमा का तकनीकी परीक्षण ही इस घटना के कारणों को स्पष्ट कर सकेगा।