रायपुर,30 जून(वेदांत समाचार)। बिजली विभाग का स्मार्ट मीटर अब इतना स्मार्ट हो गया है कि वह अब अपनी मनमानी पर उतर आया है। हाल ही में बिजली विभाग ने जो बिजली का बिल बढ़ाया है उसमें उद्योगपतियों को बिल में राहत दी और सामान्य उपभोक्ताओं का बिजली बिल बढ़ाकर गाज गिरा दी है। अधिकारी इस मामले को मुख्यमंत्री तक पहुंचने नहीं दे रहे है। और शासन को बदनाम करने पर तुले है। बिजली विभाग स्वयं सीएम साहब संभालते है औऱ अधिकारियों पर भरोसा कर विभाग को उनके हवाले किए है ताकि आम जनता को किसी भी तरह की परेशनी न हो लेकिन अधिकारी आम जनता को परेशानी में डाल रहे है और मुख्यमंत्री तक खबर पहुंचा भी नहीं रहे है।
बिजली विभाग का सुरसा वाला स्मार्ट मीटर का जिन्न बोतल से बाहर आ गया है। जनता को करंट पर करंट मार रही है। सरप्लस वाले राय में बिजली उपभोक्ताओं की दुर्गति एसा कभी देखने को नहीं मिला । बिजली उपभोक्ता अब दोगुना चौगुना बिजली बिल से हलाकान है। कुछ तो राहत तो सरकार की गुहार लगा रही है। पिछले तीन सालों में लगातार पांचवीं बार बिजली बिल की दरें बढ़ाई गई है। विपक्षी पार्टी ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि इस बार घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 30 से 50 पैसे और गैर-घरेलू (कमर्शियल) दरों में 20 से 40 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी की गई है। नेताओ ने या भी कहा कि
बढ़ोतरी कर दी गई है. इसके अलावा हाल ही में 12त्न विद्युत ईंधन अधिभार (एमपीपीएस) अलग से थोपा गया था। इस सम्बन्ध में प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष ने बिजली की बढ़ती कीमतों और स्मार्ट मीटरों की कथित गड़बडिय़ों को लेकर मोर्चा खोल दिया है, उनके मुताबिक जुलाई से उनकी पार्टी प्रदेश भर में बढ़ी हुई बिजली दर के खिलाफ जान अभियान शुरू करने वाली है जिसके तहत उनके कार्यकर्त्ता घर घर जाकर लोगों से स्मार्ट मीटर हटाने फार्म भरवाकर मुख्यमंत्री को सौपेगी। विपक्षी पार्टी ने राय सरकार पर हमला बोलते हुए इसे जनता पर सीधा आर्थिक अत्याचार बताया. उन्होंने मांग की है कि उत्तर प्रदेश में भी जहाँ भाजपा की सरकार है जन भावना को देखते हुए स्मार्ट मीटर योजना को फिलहाल स्थगित कर दिया है उसे देखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार को भी जनहित में स्मार्ट मीटर वापस लेने का फैसला करना चाहिए।
आम जनता का कहना है कि बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर तत्काल सरकार को रोक लगाना चाहिए। देखा जा रहा है कि बिजली विभाग उपभोक्ताओं को लूटने का जरिया बन चुका है। बंद घरो में भी स्मार्ट मीटर सामान्य मीटरों की तुलना में बेहद तेज भाग रहे हैं, जबकि उन घरो में मीटर बंद होना चाहिए इस वजह से बंद घरो में भी वास्तविक खपत से कहीं यादा रीडिंग आ रही है, जिसका निराकरण करने ब्वाला कोई नहीं है और इसी बढ़ी हुई रीडिंग का बहाना बनाकर विभाग बिना उपभोक्ता की सहमति के उनका अनुबंध भार (सेंक्शंड लोड) खुद-ब-खुद बढ़ा रहा है, जो कि नियमों के खिलाफ है। इसके बाद एग्रीमेंट से अधिक खपत बताकर उपभोक्ताओं पर भारी-भरकम पेनाल्टी जोडक़र बिल भेज रहे हैं।
बिजली के मुद्दे पर अभी प्रदेश में सियासत का पारा सातवें आसमान पर है विपक्षी पार्टी इस जनाक्रोश को भुनाने में लगी है। उन्होंने कांग्रेस सरकार के कार्यकाल से तुलना करते हुए कहा कि कांग्रेस ने अपने 5 साल के कार्यकाल में केवल 2 पैसे की बढ़ोतरी की थी, और 400 यूनिट तक बिजली बिल हाफ योजना से प्रदेश के लाखों परिवारों को बड़ी राहत मिल रही थी. भाजपा सरकार ने न केवल इस राहत योजना को बंद कर दिया, बल्कि जून के महीने में ही प्रदेश के 45 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को सामान्य से तीन गुना अधिक बिल थमा दिया. आज जनता बिजली कटौती से भी जूझ रही है और अनाप-शनाप बिलों से भी परेशान है. मजे की बात बिजली बिल एक बार जो आ गया उसे पहले जमा करना ही पड़ता है बाद में एडजस्टमेंट की बात बिजली अधिकारियो द्वारा की जाती है जिससे आम जनता काफी ट्रस्ट है कोई सुनवाई नहीं है। तेल गैस के बढ़ी हुई कीमतों से जनता परेशान तो थी ही अब ने समस्या बढ़ी हुई बिजली दर तकलीफदेह साबित हो रहा है।
मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना में बड़े बकायादारों को सबसे ज्यादा लाभ हुआ है। यही कारण है कि बड़े बकायादारों ने इस य़ोजना में रूचि दिखाई औऱ सफल हो गए । वहीं दूसरी ओर सामान्य उपभोक्ता और कृषि उपभोक्ता समाधान योजना में रूचि नहीं दिखा रहे है। वहीं सरकारी बिभाग बकाया बिजली बिल भुगतान में रूचि नहीं दिखा रहे है। अब तक बकायादारों का 700 करोड़ का बिल माफ हो चुका है। घरेलू बीपीएल, सामान्य औऱ कृषि उपभोक्ताओ से बकाया बिजली बिल बसूली के लिए चलाए जा रहे समाधान अभियान को दो माह आगे बढ़ाने के तैयारी की जा रही है, इसके संकेत मुख्यमंत्री ने दिए है।
मानें, तो ज्यादातर बकायादारों की बकाया राशि में मूल से ज्यादा सरचार्ज है। सरचार्ज माफ किए जाने के निर्णय के बाद बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं ने समाधान योजना में पंजीयन कराया और लाभ उठाया। प्राप्त जानकारी के अनुसार समाधान योजना लागू होने के बाद से अब तक बकायादारों की मूल बकाया राशि में से 72 करोड़ रुपए कंपनी को प्राप्त हो चुके हैं। वहीं सरचार्ज और बकायादारों द्वारा बिल भुगतान करने के लिए दी गई छूट मिलकर 700 करोड़ रुपए से अधिक राशि की छूट मिल चुकी है। कई बकायादारों द्वारा किस्तों में बकाया बिल का भुगतान किया जा रहा है। इधर, कंपनी प्रबंधन समाधान योजना को आगे बढ़ाने की तैयारी हो चुकी है। प्रबंधन का मानना है कि समाधान योजना का लाभ सैकड़ों बकायादारों ने उठाया।

