पेड़ के नीचे स्कूल, लकड़ी के पुल से सफर, आज भी विकास की राह देख रहे वनांचल क्षेत्र के गांव... - vedantsamachar.in

पेड़ के नीचे स्कूल, लकड़ी के पुल से सफर, आज भी विकास की राह देख रहे वनांचल क्षेत्र के गांव…

नगरी,26 जून (वेदांत समाचार)। एक ओर देश अमृतकाल और विकसित भारत की बात कर रहा है, वहीं नगरी विकासखंड का वनांचल क्षेत्र आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है। यहां के लोगों के लिए सड़क, पुल-पुलिया, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा आज भी किसी सपने से कम नहीं हैं। हालात इतने बदतर हैं कि कई गांवों में जिंदगी दशकों पीछे छूटी हुई दिखाई देती है।

हाल ही में 22 जून को इसी दर्द को लेकर हजारों ग्रामीण धमतरी जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और अपनी आवाज बुलंद की। प्रशासन ने आश्वासन तो दिया, लेकिन सवाल अब भी वही है क्या इस बार भी ग्रामीणों को सिर्फ भरोसा मिलेगा या वास्तव में विकास उनके गांव तक पहुंचेगा। हमारी ग्रैंड न्यूज की टीम जब उस वनांचल क्षेत्र ग्राम पंचायत खल्लारी के आश्रित गांव गाताबहारा सहित वनांचल क्षेत्र के कई गांवों में पहुंची, तो सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला। गांव में स्कूल भवन नहीं है। छोटे-छोटे बच्चे खुले आसमान के नीचे, एक पेड़ की छांव में बनी अस्थायी झोपड़ी में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। बरसात हो या तेज धूप, यही उनकी पाठशाला है।

हमारी ग्राउंड रिपोर्टिंग सफर ग्राम रिसगांव की ओर आगे बढ़ी तो तस्वीर और भी चिंताजनक नजर आई। जंगलों के बीच कच्ची सड़कें, नदी-नालों पर पुल-पुलिया का नामोनिशान नहीं। कई जगह ग्रामीणों ने अपने खर्च और श्रम से लकड़ियों का अस्थायी पुल तैयार किया है, जिसके सहारे रोजमर्रा की जिंदगी चल रही है। बारिश के दिनों में यही रास्ते जानलेवा बन जाते हैं। बिजली की सुविधा गांवों तक नहीं पहुंची है, जबकि स्वास्थ्य सेवाओं का हाल भी बदहाल है। किसी के बीमार पड़ने पर कई किलोमीटर तक पैदल चलना ग्रामीणों की मजबूरी बन जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से वे शासन-प्रशासन से मूलभूत सुविधाओं की मांग कर रहे हैं, लेकिन हर बार टाइगर रिजर्व के नियमों का हवाला देकर उनकी मांगों को टाल दिया जाता है।

ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के दौरान नेता विकास के बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही गांवों की सुध लेना बंद कर देते हैं। उनका कहना है कि यदि जल्द ही सड़क, पुल, स्कूल, बिजली और स्वास्थ्य जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं, तो आने वाले समय में इससे भी बड़ा जनआंदोलन किया जाएगा। सवाल यह है कि आखिर आजादी के इतने वर्षों बाद भी क्या इन वनांचल गांवों के लोगों को बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ेगा? क्या विकास की किरण कभी इन गांवों तक पहुंचेगी, या फिर ये इलाके सरकारी फाइलों में ही विकास का इंतजार करते रहेंगे।