दुर्ग, 17 जून 2026 (वेदांत समाचार)। साइबर अपराधों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत दुर्ग पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाले म्यूल बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच में आरोपियों के बैंक खातों में लाखों रुपये के संदिग्ध और अनधिकृत लेन-देन का खुलासा हुआ है। सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक रिमांड पर केंद्रीय जेल दुर्ग भेज दिया गया है।
पुलिस के अनुसार भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा संचालित समन्वय पोर्टल और पुलिस मुख्यालय से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर थाना उतई क्षेत्र में संचालित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक (IDFC First Bank) के कुछ खातों की जांच की गई। जांच के दौरान यह सामने आया कि विभिन्न साइबर ठगी मामलों में ठगी की रकम इन खातों में जमा की गई थी। बाद में इस राशि को अन्य खातों में स्थानांतरित कर निकाला गया, जिससे अवैध आर्थिक लाभ अर्जित किया गया।
पुलिस जांच में पता चला कि वर्ष 2024 से 2026 के बीच इन खातों का उपयोग साइबर ठगों द्वारा म्यूल अकाउंट के रूप में किया जा रहा था। म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खाते होते हैं जिनका इस्तेमाल साइबर अपराध से प्राप्त धनराशि को छिपाने और स्थानांतरित करने के लिए किया जाता है। मामले में 30 संदिग्ध खाताधारकों के खिलाफ अपराध क्रमांक 246/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(2), 318(3) और 318(4) के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू की गई।
विवेचना के दौरान बैंक से प्राप्त केवाईसी दस्तावेज, खाता विवरण और ट्रांजेक्शन स्टेटमेंट का बारीकी से परीक्षण किया गया। जांच में कई खातों में लाखों रुपये के संदिग्ध ट्रांजेक्शन पाए गए। इसके बाद पुलिस ने छह खाताधारकों की पहचान कर 16 जून को उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने अपने बैंक खाते, पासबुक, एटीएम कार्ड और मोबाइल सिम अन्य लोगों को उपलब्ध कराए थे, जिनका उपयोग साइबर ठगी से जुड़ी अवैध वित्तीय गतिविधियों में किया गया। इसके बदले आरोपियों को आर्थिक लाभ भी प्राप्त हुआ था।
गिरफ्तार आरोपियों में भूपेन्द्र हिरवानी (23), नवलेश्वर पाटले (35), पवन सिंह (32), आकाश चन्द्राकर (37), अर्पण शुक्ला (23) और मुकेश सिंह (23) शामिल हैं। सभी आरोपी दुर्ग और भिलाई क्षेत्र के निवासी हैं।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की पासबुक, एटीएम कार्ड, मोबाइल सिम कार्ड तथा बैंक खातों से संबंधित विभिन्न दस्तावेज जब्त किए हैं। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और अन्य संदिग्ध खाताधारकों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
इस कार्रवाई में एसीसीयू टीम और थाना उतई पुलिस की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि साइबर अपराधियों के नेटवर्क को तोड़ने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है और ऐसे मामलों में संलिप्त लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
दुर्ग पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, पासबुक, मोबाइल सिम या बैंकिंग संबंधी जानकारी उपयोग के लिए उपलब्ध न कराएं। ऐसा करना साइबर अपराध में सहभागिता माना जा सकता है और संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। किसी भी संदिग्ध साइबर गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर देने की अपील की गई है।

