कोरबा,17 जून (वेदांत समाचर)। जिले के पाली थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम नोनबिर्रा के खलारीपारा में वन विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि 13 जून को वन विभाग के अधिकारियों ने पुलिस बल के साथ खसरा नंबर 597 स्थित भूमि पर बने करीब 20 आदिवासी परिवारों के मकानों को जेसीबी मशीन से ध्वस्त कर दिया। प्रभावित परिवारों का दावा है कि कार्रवाई से पहले उन्हें किसी प्रकार का नोटिस अथवा सूचना नहीं दी गई थी।
ग्रामीणों के अनुसार, मकान तोड़े जाने के दौरान महिलाओं ने विरोध किया तो उनके साथ कथित रूप से हाथापाई और दुर्व्यवहार किया गया। आरोप है कि महिलाओं को जबरन घरों से बाहर निकाला गया। घटना में तीज कुंवर (65) के हाथ में गंभीर चोट आई, जबकि राम कुंवर (60) के सिर पर चोट लगने की बात कही गई है। वहीं ललिता बाई ने महिला पुलिसकर्मियों पर हाथ पकड़कर जबरन बाहर खींचने का आरोप लगाया है।
पीड़ित परिवारों में कांति बाई, शिवकुमारी बाई, श्याम बाई, भवरमति, राधा बाई, कमला बाई सहित अन्य ग्रामीण शामिल हैं। उनका कहना है कि कार्रवाई के दौरान घरेलू सामान, राशन, कपड़े और बर्तन सहित 10 से 15 हजार रुपये मूल्य की सामग्री मलबे में दबकर नष्ट हो गई।
ग्रामीणों का कहना है कि वे गोंड जनजाति से संबंधित हैं और पिछले लगभग 25 वर्षों से उक्त भूमि पर निवास कर रहे हैं। उनका आरोप है कि जब उन्होंने वन विभाग के कर्मचारियों से बारिश के मौसम में रहने की वैकल्पिक व्यवस्था के संबंध में पूछा तो उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। मकान टूटने के बाद प्रभावित परिवार बारिश के बीच खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने बिना पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था के की गई कार्रवाई को मानवाधिकारों तथा निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं के विपरीत बताया है।
घटना के बाद पीड़ित ग्रामीणों ने पाली थाना पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई है। शिकायतकर्ताओं में तीज कुंवर, राम कुंवर, ललिता बाई, कांति बाई, शिवकुमारी बाई, श्याम बाई, भवरमति, राधा बाई, कमला बाई और कुलदीप सहित अन्य ग्रामीण शामिल हैं। ग्रामीणों ने कथित मारपीट और दुर्व्यवहार में शामिल वन विभाग तथा पुलिस कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने तथा प्रभावित परिवारों को तत्काल आवास, राहत सामग्री और उचित मुआवजा उपलब्ध कराने की मांग की है।
पीड़ित परिवारों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो वे आंदोलन और चक्काजाम जैसे कदम उठाने को बाध्य होंगे। ग्रामीणों का कहना है कि न्याय नहीं मिलने की स्थिति में क्षेत्र में व्यापक विरोध-प्रदर्शन किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। फिलहाल मामले में वन विभाग और जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पुलिस शिकायत के आधार पर मामले की जांच कर रही है।

