JBCCI गठन को लेकर संशय से बढ़ी कोयला कर्मियों की चिंता, एक जुलाई को मनाएंगे मांग दिवस - vedantsamachar.in

JBCCI गठन को लेकर संशय से बढ़ी कोयला कर्मियों की चिंता, एक जुलाई को मनाएंगे मांग दिवस

कोरबा, 17 जून (वेदांत समाचार)। कोल इंडिया लिमिटेड में 12वीं ज्वाइंट बाइपार्टाइट कमेटी फॉर कोल इंडस्ट्री (जेबीसीसीआई) के गठन को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। वर्तमान 11वीं जेबीसीसीआई का कार्यकाल 30 जून 2026 को समाप्त हो रहा है, लेकिन अब तक नई जेबीसीसीआई के गठन की प्रक्रिया शुरू नहीं होने से कोयला कर्मियों और श्रमिक संगठनों की चिंता बढ़ गई है। इसी बीच केंद्रीय श्रमिक संगठनों ने अपनी सक्रियता तेज कर दी है और एक जुलाई को पूरे कोयला उद्योग में “मांग दिवस” मनाने का निर्णय लिया है।

जानकारी के अनुसार, कोल इंडिया में प्रस्तावित श्रम संहिताओं (लेबर कोड) के लागू होने को लेकर भी ट्रेड यूनियनों के बीच चिंता बनी हुई है। श्रमिक संगठनों का मानना है कि लेबर कोड के कुछ प्रावधान वर्तमान व्यवस्था और यूनियनों के प्रतिनिधित्व पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। इसी मुद्दे को लेकर हाल ही में विभिन्न केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के नेताओं ने केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात कर अपनी मांगें रखीं।

पांच जून को आयोजित कोल इंडिया की एपेक्स जेसीसी बैठक में भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस), एटक, एचएमएस और सीटू के प्रतिनिधियों ने एकजुट होकर लेबर कोड लागू करने पर आपत्ति जताई थी। यूनियन नेताओं का कहना था कि नए नियम लागू होने से वर्तमान प्रतिनिधित्व व्यवस्था प्रभावित हो सकती है और कई यूनियनों का अस्तित्व संकट में पड़ सकता है। बैठक के दौरान कोल इंडिया प्रबंधन ने यूनियनों की आपत्तियों को गंभीरता से सुना और आश्वासन दिया कि व्यापक चर्चा एवं सहमति के बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

श्रमिक संगठनों की सबसे बड़ी चिंता लेबर कोड में निर्धारित 20 प्रतिशत वोट की शर्त को लेकर है। वर्तमान प्रावधानों के अनुसार किसी भी यूनियन को वार्ताकार परिषद में प्रतिनिधित्व प्राप्त करने के लिए कुल कार्यरत कर्मचारियों के कम से कम 20 प्रतिशत मत हासिल करना आवश्यक होगा। श्रम मामलों के जानकारों का कहना है कि कोल इंडिया जैसे बड़े संगठन में किसी एक यूनियन के लिए इतना समर्थन जुटाना आसान नहीं होगा। यही कारण है कि अधिकांश श्रमिक संगठन इस प्रावधान में संशोधन या राहत की मांग कर रहे हैं।

यूनियन नेताओं ने मंत्रालय से मांग की है कि किसी यूनियन को मान्यता देने और वार्ताकार परिषद में प्रतिनिधित्व प्रदान करने के लिए निर्धारित 20 प्रतिशत वोट की अनिवार्यता में राहत दी जाए। इसके स्थान पर कुल पड़े वैध मतों के आधार पर 15 प्रतिशत समर्थन को मान्यता का आधार बनाने का सुझाव दिया गया है। बताया जा रहा है कि मंत्रालय ने इस मांग पर सकारात्मक विचार करने का आश्वासन दिया है।

इधर 12वीं जेबीसीसीआई के गठन में देरी की संभावना भी जताई जा रही है। जानकारों के अनुसार अधिकारियों की वेतन विसंगति से जुड़ा मामला वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है। इसके अलावा कोल इंडिया प्रबंधन की ओर से अब तक नए जेबीसीसीआई गठन के लिए कोयला मंत्रालय को औपचारिक प्रस्ताव भी नहीं भेजा गया है। उल्लेखनीय है कि 11वीं जेबीसीसीआई के गठन के लिए कोल इंडिया ने अप्रैल 2021 में कोयला मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा था, जिसे मई 2021 में मंजूरी मिल गई थी।

श्रमिक संगठनों का कहना है कि यदि जल्द ही 12वीं जेबीसीसीआई के गठन और लेबर कोड से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट निर्णय नहीं लिया गया तो कर्मचारियों के हित प्रभावित हो सकते हैं। इसी को लेकर सभी प्रमुख केंद्रीय श्रमिक संगठनों ने एक जुलाई को मांग दिवस मनाकर अपनी आवाज बुलंद करने तथा सरकार और प्रबंधन का ध्यान इस ओर आकर्षित करने का निर्णय लिया है।