कोरबा, 13 जून (वेदांत समाचार)। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में ऑयल पाम (तेल पाम) खेती किसानों के लिए आय का नया और मजबूत विकल्प बनकर उभर रही है। करीब तीन वर्ष पहले लगाए गए ऑयल पाम के पौधे अब पूर्ण विकसित होने लगे हैं और जल्द ही इनमें फल लगना शुरू हो जाएगा। इसके साथ ही किसानों को नियमित और बेहतर आमदनी मिलने की उम्मीद है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि ऑयल पाम खेती न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करेगी, बल्कि देश को खाद्य तेल उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
उद्यानिकी विभाग द्वारा वर्ष 2023 में शुरू की गई ऑयल पाम प्रोत्साहन योजना के तहत जिले के विभिन्न क्षेत्रों में लगभग 750 एकड़ भूमि पर 43,500 पौधों का रोपण कराया गया था। किसानों को निःशुल्क पौधे उपलब्ध कराए गए और तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया गया। अब अधिकांश पौधे तेजी से विकसित होकर वृक्ष का रूप ले चुके हैं।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार ऑयल पाम का पौधा लगभग चार वर्ष में फल देना शुरू कर देता है और एक बार उत्पादन शुरू होने के बाद करीब 25 वर्षों तक लगातार उपज देता है। यही कारण है कि इसे किसानों के लिए दीर्घकालिक और लाभकारी खेती माना जाता है।
ऑयल पाम एक ताड़ प्रजाति का वृक्ष है, जिसकी ऊंचाई 50 फीट तक पहुंच सकती है। इसके फलों और गुठलियों दोनों से तेल निकाला जाता है। इस तेल का उपयोग खाद्य तेल के अलावा साबुन, कॉस्मेटिक और अन्य औद्योगिक उत्पादों के निर्माण में भी किया जाता है। भारत में खाद्य तेल की बढ़ती मांग को देखते हुए ऑयल पाम उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि उत्पादन शुरू होने के बाद किसान एक हेक्टेयर क्षेत्र से सालाना दो से तीन लाख रुपये तक की आय प्राप्त कर सकते हैं। चूंकि यह बहुवर्षीय फसल है, इसलिए बार-बार बुवाई की आवश्यकता नहीं होती और रखरखाव की लागत भी अपेक्षाकृत कम रहती है। इससे किसानों का शुद्ध लाभ बढ़ता है।
किसानों को उत्पाद की बिक्री को लेकर भी चिंता करने की जरूरत नहीं होगी। केंद्र सरकार द्वारा अधिकृत कंपनियों के माध्यम से पौधों की आपूर्ति की जा रही है और भविष्य में उत्पाद की खरीद की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी। इसके अलावा जिले में प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने की योजना पर भी काम किया जा रहा है, जिससे किसानों को स्थानीय स्तर पर ही बाजार उपलब्ध हो सकेगा।
उद्यानिकी विभाग ने इस वर्ष जिले में ऑयल पाम खेती के विस्तार का लक्ष्य तय किया है। जुलाई माह में पांच विकासखंडों में कुल 150 हेक्टेयर क्षेत्र में नए पौधों का रोपण किया जाएगा। इसके लिए किसानों से आवेदन आमंत्रित किए जा रहे हैं और पात्र किसानों को निःशुल्क पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे।
अधिकारियों के अनुसार एक हेक्टेयर भूमि में लगभग 145 ऑयल पाम पौधे लगाए जा सकते हैं। पौधे पूर्ण विकसित होने तक किसान अदरक, हल्दी और अन्य अंतरवर्ती फसलों की खेती कर अतिरिक्त आय भी अर्जित कर सकते हैं।
उद्यानिकी विभाग का कहना है कि ऑयल पाम खेती में कीट और रोगों का प्रकोप अपेक्षाकृत कम होता है। यह विभिन्न प्रकार की मिट्टियों और मौसम परिस्थितियों में सफलतापूर्वक उगाई जा सकती है। किसानों को पौधरोपण से लेकर उत्पादन तक हर स्तर पर तकनीकी सहायता और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है।
खाद्य तेल उत्पादन में आत्मनिर्भरता और किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य के साथ शुरू की गई यह योजना अब कोरबा जिले में सफलता की नई कहानी लिखती नजर आ रही है। आने वाले वर्षों में ऑयल पाम खेती जिले के हजारों किसानों की आर्थिक स्थिति बदलने का माध्यम बन सकती है।

