दुनिया भर में पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता कम करने की कोशिशें तेज हो रही हैं. भारत में भी फ्लेक्स फ्यूल और एथेनॉल बेस्ड वाहनों को बढ़ावा दिया जा रहा है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक ऐसा देश भी है जहां फ्लेक्स फ्यूल तकनीक कोई नई बात नहीं है? वहां पिछले दो दशकों से इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रहा है और आज 90 प्रतिशत से ज्यादा नई कारें इसी तकनीक के साथ बिकती हैं.
यह देश है ब्राजील. एथेनॉल और फ्लेक्स फ्यूल तकनीक को अपनाने में ब्राजील दुनिया का सबसे सफल उदाहरण माना जाता है. ब्राजील में फ्लेक्स फ्यूल तकनीक की शुरुआत वर्ष 2003 में हुई थी. इसके बाद यह तकनीक इतनी लोकप्रिय हुई कि आज वहां बिकने वाली 98 प्रतिशत नई कारें फ्लेक्स फ्यूल तकनीक से लैस हैं.
फ्लेक्स फ्यूल तकनीक की खासियत
फ्लेक्स फ्यूल तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वाहन 100 प्रतिशत एथेनॉल, पेट्रोल या दोनों के किसी भी मिश्रण पर चल सकते हैं. इससे वाहन मालिक अपनी सुविधा और ईंधन की कीमत के हिसाब से ईंधन चुन सकते हैं. ब्राजील के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस तकनीक ने उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प दिए हैं और प्रदूषण कम करने में भी बड़ी भूमिका निभाई है.
सालों पहले हुई शुरुआत
ब्राजील ने एथेनॉल को बढ़ावा देने की शुरुआत काफी पहले कर दी थी. वर्ष 1931 में वहां पेट्रोल में 5 प्रतिशत एथेनॉल मिलाना अनिवार्य किया गया था. बाद में 1973 के तेल संकट के बाद सरकार ने “प्रोआल्कोल” नामक राष्ट्रीय एथेनॉल कार्यक्रम शुरू किया, जिसका उद्देश्य तेल आयात पर निर्भरता कम करना था.
अरबों लीटर एथेनॉल का उत्पादन
आज ब्राजील में पेट्रोल में लगभग 27 प्रतिशत एथेनॉल मिलाया जाता है. इसके अलावा बड़ी संख्या में वाहन सीधे एथेनॉल पर भी चलते हैं. देश में एथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से गन्ने से किया जाता है और ब्राजील दुनिया का सबसे बड़ा गन्ना से एथेनॉल बनाने वाला देश माना जाता है. 2019-20 में वहां 32.5 अरब लीटर एथेनॉल का उत्पादन हुआ था.
प्रदूषण में आई भारी गिरावट
एथेनॉल के उपयोग का असर पर्यावरण पर भी देखने को मिला है. रिपोर्ट के मुताबिक 2003 से 2022 के बीच फ्लेक्स फ्यूल वाहनों और एथेनॉल मिश्रण के कारण 63 करोड़ टन से अधिक CO2 उत्सर्जन कम हुआ. यह मात्रा दक्षिण कोरिया के कुल उत्सर्जन के बराबर बताई गई है.

