रायपुर, 7 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ में रासायनिक उर्वरकों की कालाबाजारी और जमाखोरी पर अब कड़ी कार्रवाई की जाएगी। कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि खाद की अधिक कीमत पर बिक्री या अवैध भंडारण करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और दोषी पाए जाने पर उन्हें सीधे जेल भेजा जाएगा।
रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित समीक्षा बैठक में मंत्री ने कहा कि पश्चिमी एशिया में जारी संकट को देखते हुए उर्वरकों की आपूर्ति को लेकर सरकार पूरी तरह सतर्क है और राज्य में खाद की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। साथ ही किसानों को जैविक खेती अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि वैकल्पिक संसाधनों का उपयोग बढ़े और खेती अधिक टिकाऊ बन सके।
मंत्री ने खरीफ 2026 की तैयारियों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए नियमित और आकस्मिक निरीक्षण किए जाएं। किसी भी स्तर पर गड़बड़ी मिलने पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों में भी प्राथमिकता के आधार पर उर्वरकों का भंडारण किया जाए, ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
बैठक में आगामी 5 मई से 20 मई तक प्रस्तावित “विकसित भारत संकल्प अभियान” की तैयारियों पर भी चर्चा की गई। मंत्री ने निर्देश दिया कि इस अभियान के तहत कृषि वैज्ञानिकों और विभागीय टीमों को गांव-गांव जाकर किसानों से संवाद करना होगा और उन्हें आधुनिक खेती, उन्नत तकनीक एवं वैकल्पिक उर्वरकों की जानकारी देनी होगी। इस अभियान में कृषि के साथ मछली पालन, पशुपालन, उद्यानिकी और कृषि विज्ञान केंद्रों के विशेषज्ञ भी शामिल होंगे।
मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि अभियान को प्राथमिकता और गंभीरता से लागू किया जाए, ताकि अधिक से अधिक किसानों को योजनाओं का लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल जागरूकता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मौके पर ही किसानों की समस्याओं का समाधान और योजनाओं से जोड़ने की प्रक्रिया भी सुनिश्चित की जाएगी।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि डीएपी की संभावित कमी को देखते हुए एनपीके, एसएसपी और अन्य वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही दलहन, तिलहन और मक्का जैसी फसलों को प्रोत्साहित कर खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।
मंत्री ने फार्मर आईडी के तहत एग्रीस्टैक पोर्टल में शेष किसानों का पंजीयन एक सप्ताह के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए, ताकि कोई भी किसान प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लाभ से वंचित न रहे।
समीक्षा के दौरान रायपुर और दुर्ग संभाग में फसल विविधीकरण, दलहन-तिलहन के रकबे में वृद्धि और ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया। धमतरी जिले में दलहन-तिलहन के क्षेत्रफल में वृद्धि पर संतोष जताते हुए अन्य जिलों को भी इसी दिशा में कार्य करने के निर्देश दिए गए।
पीएम-आशा योजना की समीक्षा में धमतरी को छोड़ अन्य जिलों में प्रगति धीमी पाई गई, जिस पर मंत्री ने मार्कफेड, नाफेड और समितियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर खरीदी प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए।
इसके अलावा जलाशयों में मखाना और सिंघाड़ा की खेती को बढ़ावा देने के लिए उद्यानिकी विभाग को विशेष कार्ययोजना बनाने को कहा गया। मखाना उत्पादन के साथ मछली पालन को भी बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए, ताकि किसानों की आय में वृद्धि हो सके।
बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त शहला निगार, बीज निगम के संचालक अजय अग्रवाल, मत्स्य पालन विभाग के संचालक एस.एस. नाग, पशुधन विकास विभाग के संचालक चन्द्रकांत वर्मा, उद्यानिकी विभाग के संचालक लोकेश चन्द्राकर सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
