रायगढ़, 01 जून (वेदांत समाचार)। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में हाथी के बच्चों (कलभ) की लगातार हो रही मौतों ने वन्यजीव संरक्षण और वन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ताजा मामला रायगढ़ वन मंडल के खरसिया रेंज अंतर्गत मांड नदी के गुरदा क्षेत्र का है, जहां एक हाथी के बच्चे का शव नदी में मिला है। प्रारंभिक जांच में कलभ की मौत पानी में डूबने से होने की आशंका जताई जा रही है।
घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और शव को नदी से बाहर निकाला गया। अधिकारियों के अनुसार पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विस्तृत जांच के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि की जाएगी।
जानकारी के मुताबिक, जिस इलाके में कलभ का शव मिला है वहां इन दिनों 40 से अधिक हाथियों का बड़ा दल विचरण कर रहा है। रविवार सुबह करीब 9 बजे स्थानीय ग्रामीणों ने नदी में हाथी के बच्चे का शव देखा और इसकी सूचना तत्काल वन विभाग को दी। सूचना मिलते ही वन अमला घटनास्थल पर पहुंचा और आवश्यक कार्रवाई शुरू की।
रायगढ़ जिले में हाथियों के बच्चों की मौत का यह कोई पहला मामला नहीं है। मई महीने के दौरान ही जिले में पानी में डूबने से तीन अन्य कलभों की मौत हो चुकी है। अब एक और घटना सामने आने के बाद बीते 31 दिनों के भीतर चार हाथी शावकों की मौत दर्ज की जा चुकी है। लगातार हो रही इन घटनाओं ने वन्यजीव प्रेमियों, पर्यावरणविदों और स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
वन विभाग के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जनवरी 2026 से अब तक रायगढ़ जिले में कुल 9 कलभों की मौत हो चुकी है। इतनी बड़ी संख्या में हाथी शावकों की मौत वन्यजीव प्रबंधन, निगरानी व्यवस्था और हाथियों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि हाथियों के विचरण क्षेत्रों में सुरक्षा और निगरानी को और मजबूत करने की आवश्यकता है, ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
रायगढ़ जिले में हाथियों की बढ़ती गतिविधियों के बीच लगातार सामने आ रही मौतों ने वन विभाग के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। अब सभी की नजर पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विभागीय जांच पर टिकी हुई है, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि कलभ की मौत वास्तव में डूबने से हुई या इसके पीछे कोई अन्य कारण भी जिम्मेदार है।

