रायपुर में क्रिप्टोकरेंसी निवेश के नाम पर 16 लाख की साइबर ठगी, फेसबुक फ्रेंडशिप के जाल में फंसा महालेखाकार कार्यालय का अकाउंटेंट - vedantsamachar.in

रायपुर में क्रिप्टोकरेंसी निवेश के नाम पर 16 लाख की साइबर ठगी, फेसबुक फ्रेंडशिप के जाल में फंसा महालेखाकार कार्यालय का अकाउंटेंट

रायपुर, 31 मई (वेदांत समाचार) । राजधानी रायपुर में साइबर ठगों ने क्रिप्टोकरेंसी में निवेश कर भारी मुनाफा कमाने का झांसा देकर महालेखाकार कार्यालय में पदस्थ एक अकाउंटेंट से 16 लाख 7 हजार 106 रुपये की ठगी कर ली। ठगों ने फेसबुक पर दोस्ती कर पहले विश्वास जीता और फिर ऑनलाइन निवेश के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों एवं यूपीआई आईडी में लाखों रुपये जमा करा लिए। जब पीड़ित ने अपनी रकम वापस निकालने की कोशिश की तो आरोपियों ने और पैसे की मांग शुरू कर दी। इसके बाद पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ और उसने विधानसभा थाना में शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस के अनुसार सड्डू स्थित हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी निवासी शंकर बोस महालेखाकार कार्यालय में अकाउंटेंट के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने अपनी शिकायत में बताया कि 5 फरवरी 2026 को फेसबुक पर काव्या चौधरी नाम की एक युवती की फ्रेंड रिक्वेस्ट आई थी। रिक्वेस्ट स्वीकार करने के बाद दोनों के बीच नियमित बातचीत शुरू हुई। बातचीत के दौरान युवती ने खुद को क्रिप्टोकरेंसी निवेश के जरिए अच्छा मुनाफा कमाने वाला बताते हुए शंकर बोस को भी निवेश करने की सलाह दी।

कुछ दिनों बाद युवती ने अपना व्हाट्सएप नंबर साझा किया और हर्षद करवा नामक व्यक्ति से संपर्क करने को कहा। इसके बाद हर्षद ने पीड़ित को Nincoin.com नामक प्लेटफॉर्म के जरिए क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करने का प्रस्ताव दिया। आरोपियों ने दावा किया कि कम समय में निवेश पर कई गुना रिटर्न मिलेगा और यही लालच देकर उन्हें निवेश के लिए तैयार कर लिया गया।

शुरुआत में आरोपियों ने कमीशन और प्रोसेसिंग शुल्क के नाम पर छोटी रकम जमा करवाई ताकि पीड़ित का भरोसा बना रहे। 11 फरवरी से 25 फरवरी 2026 के बीच अलग-अलग बैंक खातों में 10 हजार, 33 हजार, 88 हजार, एक लाख, 69 हजार और 80 हजार रुपये ट्रांसफर कराए गए। इसके बाद ठगों ने निवेश बढ़ाने और अधिक लाभ का लालच देकर लगातार बड़ी रकम जमा करवाना शुरू कर दिया।

पीड़ित ने बताया कि 2 मार्च को उनसे चार लाख रुपये और 18 मार्च को पांच लाख रुपये आरटीजीएस के माध्यम से जमा कराए गए। आरोपियों ने इसे “सिक्योरिटी वेरिफिकेशन” और “कॉन्ट्रैक्ट प्रोसेस” का हिस्सा बताया। इसके अलावा 50 हजार, 1.50 लाख, 90 हजार, 12 हजार 320 और 24 हजार 786 रुपये भी अलग-अलग खातों में जमा कराए गए। इस तरह कुल 16 लाख 7 हजार 106 रुपये आरोपियों द्वारा ऐंठ लिए गए।

जब शंकर बोस ने अपने निवेश और मुनाफे की राशि वापस निकालने का प्रयास किया तो आरोपियों ने निकासी प्रक्रिया रोक दी। उन्हें बताया गया कि फंड रिलीज करने के लिए अतिरिक्त शुल्क जमा करना होगा। बार-बार नई मांगें किए जाने पर उन्हें संदेह हुआ और उन्होंने आगे भुगतान करने से इनकार कर दिया। इसके बाद उन्हें एहसास हुआ कि वे साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं।

पीड़ित ने अपनी शिकायत में यह भी बताया कि निवेश के लिए उन्होंने कई बार बैंक से ऋण लेकर रकम जमा की थी। वर्तमान में उन पर ईएमआई का भारी बोझ है। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी हृदय संबंधी बीमारी से पीड़ित है, जबकि उनकी पत्नी का इलाज न्यूरोलॉजिस्ट की देखरेख में चल रहा है। ऐसे में लाखों रुपये की ठगी से परिवार गंभीर आर्थिक संकट में आ गया है।

मामले की शिकायत मिलने पर विधानसभा थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66डी के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामले की विवेचना निरीक्षक शिवेंद्र राजपूत को सौंपी गई है। पुलिस बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, यूपीआई आईडी और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन की जानकारी जुटाकर आरोपियों की पहचान करने में जुटी हुई है।

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर अनजान लोगों द्वारा दिए जाने वाले निवेश प्रस्तावों और क्रिप्टोकरेंसी में जल्दी मुनाफा कमाने के दावों से सावधान रहें। किसी भी ऑनलाइन निवेश से पहले संबंधित प्लेटफॉर्म और व्यक्ति की पूरी जांच-पड़ताल अवश्य करें।