रायगढ़ रेलवे स्टेशन पर डेढ़ साल के मासूम की पिटाई, कोतवाली पुलिस ने बचाई जान, अस्पताल से लेकर बाल कल्याण समिति तक संभाली जिम्मेदारी - vedantsamachar.in

रायगढ़ रेलवे स्टेशन पर डेढ़ साल के मासूम की पिटाई, कोतवाली पुलिस ने बचाई जान, अस्पताल से लेकर बाल कल्याण समिति तक संभाली जिम्मेदारी

रायगढ़, 29 मई (वेदांत समाचार)। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ रेलवे स्टेशन के बाहर डेढ़ साल के मासूम बच्चे के साथ हो रही बेरहमी ने लोगों को झकझोर कर रख दिया। रेलवे स्टेशन परिसर के बाहर एक महिला द्वारा बच्चे की लगातार पिटाई किए जाने की सूचना मिलते ही रायगढ़ कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और बच्चे को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया। पुलिस की तत्परता से न केवल मासूम की जान बची, बल्कि उसके इलाज, संरक्षण और कानूनी प्रक्रिया तक की पूरी जिम्मेदारी भी निभाई गई।

घटना 19 मई की शाम की बताई जा रही है। रेलवे स्टेशन के बाहर मौजूद लोगों ने देखा कि एक महिला छोटे बच्चे को बेरहमी से मार रही है। बच्चे की चीख-पुकार सुनकर आसपास मौजूद लोगों ने महिला को रोकने की कोशिश की, लेकिन वह किसी की बात सुनने को तैयार नहीं थी। इसके बाद तत्काल कोतवाली पुलिस को सूचना दी गई।

सूचना मिलते ही पेट्रोलिंग टीम में शामिल एएसआई गौतम ठाकुर, आरक्षक गणेश पैंकरा और अन्य पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने महिला के चंगुल से बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालकर अपने संरक्षण में लिया। पूछताछ के दौरान महिला ने बच्चे को खरसिया से ट्रेन में लेकर आने की बात कही, लेकिन उसके व्यवहार और जवाबों से पुलिस को मामला संदिग्ध लगा।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए महिला को थाने लाया गया, जबकि घायल और डरे हुए बच्चे को तुरंत इलाज के लिए केजीएच अस्पताल पहुंचाया गया। थाना कोतवाली की महिला आरक्षक अनिता बेक ने बच्चे के उपचार की जिम्मेदारी संभाली। प्राथमिक उपचार के बाद बच्चे को मातृ शिशु वार्ड (एमसीएच) में भर्ती कराया गया, जहां उसकी लगातार देखभाल की गई।

इधर थाने में पूछताछ के दौरान महिला लगातार असंगत और उटपटांग बातें करती रही, जिससे उसकी मानसिक स्थिति सामान्य नहीं होने की आशंका जताई गई। इसके बाद कोतवाली पुलिस ने महिला को सखी सेंटर में रखवाया और उसके परिजनों की तलाश शुरू की। जांच में पता चला कि महिला इंदिरा नगर क्षेत्र की रहने वाली है। पुलिस ने उसके पति को थाने बुलाकर पूछताछ की, जिसमें उसने बताया कि उसकी पत्नी की मानसिक स्थिति समय-समय पर बिगड़ जाती है। पूछताछ में यह भी सामने आया कि बच्चा उसी महिला का पुत्र है।

पुलिस ने बच्चे की सुरक्षा और उपचार को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उसे अस्पताल में भर्ती रखा। 26 मई को बच्चे को डिस्चार्ज किया जाना था, तब उसके परिजन अस्पताल पहुंचे। अस्पताल प्रबंधन ने बच्चे को महिला आरक्षक अनिता बेक के सुपुर्द किया, जिन्होंने भर्ती से लेकर उपचार तक उसकी पूरी देखभाल की थी।

थाना प्रभारी सुखनंदन पटेल के निर्देशन में महिला आरक्षक अनिता बेक ने बच्चे को बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया। समिति ने बच्चे के माता-पिता, दादी और नानी को बुलाकर काउंसलिंग की और पूरे मामले की समीक्षा की। इसके बाद बच्चे को अस्थायी रूप से उसके पिता के सुपुर्द कर दिया गया।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए बाल कल्याण समिति ने 29 मई को दोबारा माता-पिता को काउंसलिंग और अन्य आवश्यक प्रक्रियाओं के लिए बुलाया है। वहीं कोतवाली पुलिस भी बच्चे की सुरक्षा और भविष्य को लेकर लगातार निगरानी बनाए हुए है।

इस पूरे मामले में रायगढ़ पुलिस की संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई की सराहना की जा रही है। समय रहते हस्तक्षेप कर पुलिस ने एक मासूम को गंभीर नुकसान से बचाया और यह साबित किया कि पुलिस सिर्फ कानून व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरत पड़ने पर संवेदनशील संरक्षक की भूमिका भी निभाती है।

इस मामले को लेकर एसएसपी शशि मोहन सिंह ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा समाज और परिवार दोनों की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि किसी बच्चे के साथ हिंसा, उपेक्षा या दुर्व्यवहार की जानकारी मिले तो तुरंत पुलिस को सूचित करें। उन्होंने कहा कि रेलवे स्टेशन पर मौजूद लोगों की सजगता और कोतवाली पुलिस की त्वरित कार्रवाई से एक मासूम को समय रहते सुरक्षित उपचार और संरक्षण मिल सका।