Vedant Samachar

एक्शन मोड में RBI! युद्ध के बीच बैंकों से पूछा-मिडल ईस्ट में कितना फंसा है आपका पैसा?

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रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने बैंकों से कहा है कि वे वेस्ट एशिया में अपने सीधे और परोक्ष (indirect) निवेश और जोखिम की पूरी जानकारी दें. दरअसल, ईरान युद्ध की वजह से दुनियाभर के करीब 2.5 ट्रिलियन डॉलर के बॉन्ड मार्केट में हलचल मच गई है और ऊर्जा सप्लाई चेन भी प्रभावित हुई है. यह इलाका भारत के लिए सबसे बड़ा रेमिटेंस (विदेश से आने वाला पैसा) देने वाला क्षेत्र भी है.

बैंकरों के मुताबिक, RBI यह समझना चाहता है कि किन-किन जगहों पर जोखिम हो सकता है. जैसे वेस्ट एशिया में काम कर रही भारतीय कंपनियां, वहां ज्यादा इंपोर्ट-एक्सपोर्ट करने वाली कंपनियां, और एनआरआई ग्राहकों के होम लोन जैसे रिटेल एक्सपोजर. एक निजी बैंक के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि बैंकों का सीधा एक्सपोजर भले कम हो, लेकिन कई कंपनियां वहां के कारोबार पर काफी निर्भर हैं. ऐसी जानकारी आमतौर पर RBI को दी जाने वाली नियमित रिपोर्टिंग में नहीं आती, लेकिन इस तरह के अनिश्चित समय में यह डेटा जरूरी है.

बैंकरों का मानना है कि इस जानकारी के आधार पर RBI जरूरत पड़ने पर आने वाले महीनों में राहत के उपाय कर सकता है, हालांकि अभी स्थिति लगातार बदल रही है. सरकारी बैंक के एक अधिकारी ने बताया कि LPG की कमी का असर दिखना शुरू हो गया है. उर्वरक (fertiliser) जैसे अहम सेक्टर भी प्रभावित हो सकते हैं. गुजरात के मोरबी में सिरेमिक उद्योग को कुछ समय के लिए काम बंद करना पड़ा है. हालांकि इसका तुरंत असर बैंकों पर नहीं पड़ेगा, लेकिन अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में बैलेंस शीट पर दबाव आ सकता है.

तेल से बढ़ेगी महंगाई
बैंकरों का कहना है कि ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स, होटल और अन्य सेक्टर में आयातित महंगाई (imported inflation) बढ़ सकती है. बड़ी कंपनियों की स्थिति अभी मजबूत है, लेकिन सबसे ज्यादा असर छोटे और मझोले उद्योग (MSME) पर पड़ेगा. एक अन्य बैंक अधिकारी ने कहा कि अगर हालात लंबे समय तक ऐसे ही रहे, तो RBI को मोरेटोरियम (कर्ज भुगतान में राहत) या इमरजेंसी क्रेडिट लाइन जैसे कदम उठाने पड़ सकते हैं.

भारत के लिए अहम है गल्फ से पैसा
गल्फ देश भारत के लिए सबसे बड़े रेमिटेंस देने वाले बाजार हैं. FY24 में भारत को मिले 119 अरब डॉलर के कुल रेमिटेंस में से करीब 38% हिस्सा GCC देशों से आया, जिसमें अकेले UAE का हिस्सा करीब छठा हिस्सा है. ये पैसा भारत के शहरी रियल एस्टेट और घरेलू खर्च को मजबूत बनाने में बड़ी भूमिका निभाता है.

एक्सपोर्ट पर भी खतरा
एक्सपोर्टर्स के मुताबिक, अगर भू-राजनीतिक तनाव और लॉजिस्टिक्स दिक्कतें जारी रहीं, तो भारत के निर्यात को 8-10 अरब डॉलर तक का झटका लग सकता है. वेस्ट एशिया से ऑर्डर कैंसिल हो रहे हैं और डिलीवरी को लेकर अनिश्चितता बढ़ रही है. फिलहाल RBI बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त नकदी बनाए रखने और रुपये को ज्यादा गिरने से रोकने की कोशिश कर रहा है. लेकिन अगर संकट लंबा खिंचता है, तो केंद्रीय बैंक को और बड़े कदम उठाने पड़ सकते हैं.

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