बिलासपुर, 25 मार्च 2026। सायबर अपराधों की रोकथाम एवं विवेचना की गुणवत्ता में सुधार के उद्देश्य से बिलासपुर रेंज में एक दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन स्थानीय चेतना हॉल में किया गया। कार्यशाला का आयोजन पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर रेंज राम गोपाल गर्ग के नेतृत्व में किया गया, जिसमें रेंज के विभिन्न जिलों से लगभग 100 पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल हुए।
कार्यक्रम में उप पुलिस महानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बिलासपुर रजनेश सिंह, पुलिस अधीक्षक जांजगीर-चांपा विजय पाण्डेय, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) बिलासपुर मधुलिका सिंह, नगर पुलिस अधीक्षक (कोतवाली) गगन कुमार, नगर पुलिस अधीक्षक रायगढ़ मयंक मिश्रा, साइबर विशेषज्ञ आरिफ खान (दुर्ग), साइबर सेल प्रभारी मुंगेली प्रसाद सिन्हा, आरक्षक नवीन एक्का तथा कार्यक्रम संचालक उमाशंकर पाण्डेय सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
उद्घाटन सत्र में रजनेश सिंह ने वर्तमान समय में साइबर अपराधों की बढ़ती चुनौतियों के बीच तकनीक के प्रभावी उपयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। वहीं राम गोपाल गर्ग ने कहा कि तकनीकी दक्षता ही पुलिस को अपराधियों से आगे रख सकती है। विजय पाण्डेय ने विवेचना को आधुनिक चुनौतियों के अनुरूप उन्नत करने की आवश्यकता बताई।
कार्यशाला के विभिन्न तकनीकी सत्रों में विषय विशेषज्ञों ने विस्तार से जानकारी दी। गृह मंत्रालय द्वारा जनवरी 2026 में जारी नई एसओपी के संबंध में नगर पुलिस अधीक्षक (कोतवाली) गगन कुमार ने पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से ठगी की राशि को होल्ड एवं वापस कराने की प्रक्रिया समझाई।
नेटग्रिड के उपयोग और महत्व पर मयंक मिश्रा ने प्रकाश डाला। वहीं आरिफ खान ने साइबर फॉरेंसिक, साक्ष्य संकलन तथा विभिन्न साइबर फ्रॉड के तरीकों को लाइव डेमो के माध्यम से प्रस्तुत किया और डार्क नेट की जानकारी साझा की।
सत्र में आधुनिक तकनीकी टूल्स जैसे सीडीआर एनालिसिस, सी-ट्रेस, सशक्त एप और त्रिनयन सिस्टम के उपयोग पर प्रसाद सिन्हा और नवीन एक्का ने जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन टूल्स के माध्यम से चोरी या गुम वाहनों की पहचान एवं अपराधियों की लोकेशन ट्रेस करने में मदद मिलती है।
कार्यक्रम के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने विवेचना के दौरान आने वाली व्यावहारिक समस्याओं को साझा किया। इस पर राम गोपाल गर्ग ने समाधान प्रस्तुत करते हुए साइबर विवेचना को और प्रभावी बनाने के सुझाव दिए।
समापन अवसर पर मधुलिका सिंह ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस कार्यशाला से साइबर अपराधों की समझ और विवेचना की गुणवत्ता में निश्चित रूप से सुधार होगा। कार्यक्रम का संचालन उमाशंकर पाण्डेय ने किया। कार्यशाला के अंत में सभी प्रशिक्षकों को स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया।
