पेंड्रा, 23 मार्च (वेदांत समाचार)। छत्तीसगढ़ के घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच स्थित भनवारटंक रेलवे स्टेशन के पास विराजमान वन देवी मां मरही माता का मंदिर आस्था का एक अनोखा केंद्र बना हुआ है। इस मंदिर की खासियत सिर्फ इसकी धार्मिक मान्यता ही नहीं, बल्कि यह भी है कि यहां तक पहुंचने के लिए कोई सीधा सड़क मार्ग नहीं है। बावजूद इसके, दूर-दूर से श्रद्धालु कठिन रास्तों को पार कर माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के पेंड्रा-कटनी से बिलासपुर रेल मार्ग पर खोंगसरा और खोडरी स्टेशन के बीच स्थित यह मंदिर रेल पटरी के बिल्कुल किनारे बना हुआ है। मान्यता है कि यहां से गुजरने वाली ट्रेनों के चालक मंदिर के सामने अपनी गति धीमी कर माता को नमन करते हैं और फिर आगे बढ़ते हैं। यही कारण है कि इस मंदिर की ख्याति दूर-दूर तक फैली हुई है।
नवरात्र में उमड़ती है भक्तों की भारी भीड़
चैत्र नवरात्र के दौरान मरही माता मंदिर में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ता है। हालांकि सालभर यहां श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन नवरात्र के नौ दिनों में भक्तों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। श्रद्धालु माता के दर्शन कर मंदिर परिसर में अपनी मनोकामना पूर्ण होने के लिए नारियल बांधते हैं और मनोकामना पूरी होने पर पुनः आकर माता के चरणों में धन्यवाद अर्पित करते हैं।
मंदिर की अनोखी परंपराएं
इस मंदिर की एक और विशेषता यह है कि यहां पूजा-अर्चना किसी पंडित द्वारा नहीं, बल्कि स्थानीय बैगा परिवार द्वारा की जाती है। इसके अलावा, मन्नत पूरी होने पर पशु बलि देने की परंपरा भी है, हालांकि नवरात्र के दौरान नौ दिनों तक बलि पर पूरी तरह रोक रहती है। नवरात्र के अवसर पर मंदिर में ज्योत कलश प्रज्ज्वलित किए जाते हैं और भंडारे का आयोजन भी किया जाता है।

1984 के रेल हादसे के बाद बढ़ी आस्था
स्थानीय लोगों के अनुसार, वर्ष 1984 में इंदौर-बिलासपुर नर्मदा एक्सप्रेस रेल हादसे के बाद यहां ड्यूटी पर तैनात रेलवे कर्मचारियों और वन विभाग के कर्मियों ने मरही माता की प्रतिमा स्थापित की थी। इसके बाद से इस स्थान की धार्मिक मान्यता और भी बढ़ गई। लोगों का विश्वास है कि माता के आशीर्वाद से इस पहाड़ी और जंगली क्षेत्र में रेल हादसों से रक्षा होती है।
मध्यप्रदेश सहित अन्य राज्यों से पहुंचते हैं श्रद्धालु
मंदिर में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों के साथ-साथ मध्यप्रदेश और अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। कठिन परिस्थितियों के बावजूद श्रद्धालुओं की अटूट आस्था इस मंदिर को एक विशेष पहचान देती है।
मरही माता मंदिर आज भी श्रद्धा, विश्वास और अद्भुत आस्था का प्रतीक बना हुआ है, जहां भक्तों का विश्वास है कि माता हर मनोकामना पूरी करती हैं और अपने भक्तों की हर पीड़ा हर लेती हैं।
